चैलेंजिंग होता है कास्टिंग डायरेक्टर का काम, पढें बिहार के रहने वाले कास्टिंग डायरेक्टर भरत झा से खास बातचीत

फिल्म लाइन में सबसे अहम होता है डायरेक्टर के नजर को देखना और उसके बाद एक्टर या एक्ट्रेस को उसी के अनुसार दर्शकों के सामने पेश करना. यह कहना है फिल्म जगत में कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में अपनी पहचान बना रहे बिहार के निवासी भरत झा का. सुजीत कुमार से हुई बातचीत के प्रमुख […]

फिल्म लाइन में सबसे अहम होता है डायरेक्टर के नजर को देखना और उसके बाद एक्टर या एक्ट्रेस को उसी के अनुसार दर्शकों के सामने पेश करना. यह कहना है फिल्म जगत में कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में अपनी पहचान बना रहे बिहार के निवासी भरत झा का. सुजीत कुमार से हुई बातचीत के प्रमुख अंश…

-सबसे पहले अपने बारे में बताएं.
मेरा घर मधुबनी जिले के झंझारपुर ब्लॉक के मेहथ गांव में है. प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई. इसके बाद मधुबनी से ही दसवीं तक की शिक्षा की और फिर बारहवीं से लेकर ग्रेजुएशन तक की शिक्षा दरभंगा से ग्रहण किया.

-कास्टिंग डायरेक्टर बनना है? इसका ख्याल कहां से आया?
दरअसल शुरू से ही मन में यह ख्याल था कि मुझे फिल्म लाइन में जाना है. करना क्या है? इस बात का कोई अंदाजा नहीं था. बस काम करने की तमन्ना थी. सही मार्गदर्शन देने वाला भी कोई नहीं था. ग्रेजुएशन किया तो दो साल तक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव का भी काम किया लेकिन मन नहीं लगता था. दरभंगा मेरा वर्किंग प्लेस था. दिन में काम करता था लेकिन रात में फिल्म लाइन के जाने के बारे में सोचते रहता था. 2003 में फाइनली मुंबई चला गया.

-वहां जाने के बाद कितना संघर्ष करना पड़ा? क्योंकि मार्गदर्शन के लिए भी कोई नहीं था.
वहां किसी से भी जान-पहचान नहीं थी लेकिन काम करने का जुनून था. एक दिन न्यूज पेपर में विज्ञापन देखा जिसमें नादिरा बब्बर के थिएटर ग्रुप एकजुट में हिस्सा लेने के लिए छपा हुआ था. मैंने आवेदन दिया और चयन हो गया. वह मेरे लिए फिल्म लाइन में घुसने का बड़ा रास्ता था. उसमें काम करने के दौरान कई तरह के अनुभव हुए. जो बाद में मेरे काम आये. उसी थिएटर ग्रुप में कई दोस्त बने, जिन्होंने बाद में मेरी मदद भी की.

-पहला ब्रेक किस तरह से मिला? वह अनुभव कैसा रहा?
जब थिएटर ग्रुप एकजुट से निकला तो एक दोस्त की मदद से विधु विनोद चोपड़ा के प्रोडक्शन हाउस में जॉब लग गयी. वहां प्रोडक्शन मैनेजमेंट का काम किया. उस दौरान थ्री इडियट फिल्म बन रही थी. वह फिल्म जब पूरी हुई तो विजय नाम्बियार की फिल्म शैतान के साथ जुड़ा. वहीं से पहली बार कास्टिंग डायरेक्टर के रूप में काम करने का मौका मिला. वहां मेरा काम पसंद किया गया. इसके बाद फिल्म डेविड तथा अनिल कपूर की सीरीज 24 में काम किया. इससे अनुभव बढ़ता गया. साजिद नाडियाडवाला की फिल्म किक में काम करने का बड़ा अनुभव हुआ. इसमें कास्टिंग तो किया ही, स्क्रिप्ट की जिम्मेदारी को भी संभाला. इसके बाद बाजी, हाउसफूल थ्री की कास्टिंग की. अनुभव सिन्हा की फिल्म मुल्क की कास्टिंग भी किया.

-कास्टिंग डायरेक्टर का कार्य कितना चैलेंजिंग होता है? सबसे मजेदार अनुभव कब हुआ?
कास्ट के नजरिये से ही फिल्म दिखती है. कास्टिंग कैसा हो? इसके लिए डायरेक्टर के नजरिये से देखना होता है. डायरेक्टर को बताना पड़ता है कि यह कास्ट कुछ अलग है. अनिल कपूर की 24 सीरीज में काम करना मेरे लिए मजेदार अनुभव रहा.

-आने वाले प्रोजेक्ट कौन-कौन से हैं?
नवाजुद्दीन और अथिया शेट्टी के साथ एक फिल्म को पूरी किया हूं. यह विवाह पर आधारित एक पारिवारिक कॉमेडी है. भुवनेश्वर के कुछ बच्चों ने 2007 में रग्बी विश्वकप में जीत हासिल किया था. उस पर आधारित एक फिल्म जंगल क्रॉस भी करनी है. इसके अलावा कुछ वेब सीरीज और शॉर्ट फिल्में भी हैं.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >