मुंबई : फिल्मकार शोनाली बोस ने यौन उत्पीड़न का दर्द साझा करने वाली महिलाओं के साहस की सराहना करते हुए कहा कि ‘मी टू’ अभियान को सिर्फ पुरुषों पर हमला करने का माध्यम बनने तक नहीं सिमटना चाहिए.
जियो मामी मुंबई फिल्म फेस्टिवल में ‘मी टू’ पर शुक्रवार को पैनल चर्चा के दौरान बोस ने कहा, इस अभियान को किसी भी मौके पर पुरुषों पर प्रहार करने का माध्यम मात्र नहीं बनना चाहिए. यह किसी महिला या पुरुष के बारे में नहीं है, यह हमारे समाज की जड़ में बसी पितृसत्ता के बारे में है.
मैं दिल्ली के एक प्रमुख कॉलेज में थी, मेरा ऑडिटोरियम में यौन उत्पीड़न हुआ था, मैं स्टेज पर गई और कहा कि हम यह उत्सव बंद कर रहे हैं क्योंकि हम में से कई ने इसका सामना किया है. उन्होंने बताया, प्रधानाचार्य ने कहा कि मुझे कॉलेज से निष्कासित किया जाएगा.
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यह विचारधारा के संबंध में है जैसे महिला क्या पहन रही है, कैसे अपने आप को पेश करती है जैसी चीजों के लिए उसे शर्मसार किया जाता है…यह सिर्फ पुरुषों की तरफ से ही नहीं कहा जाता बल्कि महिलाएं भी कहती हैं. शोनाली बोस ने कहा कि उनका मानना है कि सीमाओं को तोड़ने और रूढ़िवाद को खत्म करने के लिए सिनेमा सबसे बेहतर जरिया है.
