नहीं रहे ''वडाली ब्रदर्स'' के मशहूर पंजाबी सूफ़ी सिंगर प्यारेलाल वडाली

नयी दिल्‍ली: उस्‍ताद पुरन चंद वडाली के भाई उस्ताद प्यारेलाल वडाली का शुक्रवार की सुबह अमृतसर में निधन हो गया. वे 75 वर्ष के थे. उन्‍होंने अंतिम सांस अमृतसर के फोर्टिस एस्‍कॉर्ट हॉस्पिटल में ली. बीमार होने की वजह से उन्‍हें गुरुवार को अस्‍पातल में भर्ती कराया गया था. बता दें कि पंजाबी सूफी भाईयों […]

नयी दिल्‍ली: उस्‍ताद पुरन चंद वडाली के भाई उस्ताद प्यारेलाल वडाली का शुक्रवार की सुबह अमृतसर में निधन हो गया. वे 75 वर्ष के थे. उन्‍होंने अंतिम सांस अमृतसर के फोर्टिस एस्‍कॉर्ट हॉस्पिटल में ली. बीमार होने की वजह से उन्‍हें गुरुवार को अस्‍पातल में भर्ती कराया गया था. बता दें कि पंजाबी सूफी भाईयों की जोड़ी को ‘वडाली ब्रदर्स’ के नाम से पहचाने जाते हैं.

निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गांव ले जाया गया. पार्थिव देह कोअंतिम दर्शन के लिए रखा गया है. पंजाबी सूफी गानों के लिए मशहूर वडाली ब्रदर्स में उस्‍ताद प्‍यारे लाल छोटे भाई थे. अमृतसर के पास एक छोटे से गांव के रहनेवाले वडाली ब्रदर्स दुनियाभर में मशहूर थे.

दोनों ने हरबल्‍ला मंदिर में परफॉर्म करना शुरू किया था. दोनों भाईयों की जोड़ी काफियां, गज़ल और भजन जैसी कई तरह की गायकी करते थे. वड़ाली ब्रदर्स बॉलीवुड के कई गानों के लिए भी याद किये जाते हैं. जिसमें ए रंगरेज मेरे (तनु वेड्स मनु), दर्दा मारेया (पिंजर), चेहरा मेरे यार का (धूप) और तू ही तू ही (मौसम) शामिल है.

वडाली ब्रदर्स को उनके काम के लिए साल 1992 में संगीत नाटक अकादमी का प्रतिष्ठित सम्मान दिया गया. वहीं उन्‍हें 1998 में उन्हें तुलसी अवॉर्ड दिया गया था.

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