Khesari Lal Yadav Success Journey: भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव आज भले ही सफलता की ऊंचाइयों पर हैं, लेकिन उनकी जिंदगी का सफर संघर्षों से भरा रहा है. कभी ऐसा समय भी था जब उनके पास शादी के लिए सेहरा खरीदने तक के पैसे नहीं थे. आर्थिक तंगी इतनी ज्यादा थी कि परिवार को उनकी शादी के लिए चार भैंसें बेचनी पड़ी थीं.
संघर्षों से भरा शुरुआती जीवन
खेसारी लाल यादव का बचपन बेहद साधारण और कठिन परिस्थितियों में बीता. मिट्टी के घर में रहने वाले खेसारी के परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी. महज 20 साल की उम्र में उनकी शादी तय हुई, लेकिन उस वक्त उनके पास कोई स्थायी काम नहीं था. ससुराल की तरफ से तिलक में मिले 11 हजार रुपये भी उनके पिता ने लौटा दिए और अपनी तरफ से इंतजाम करने के लिए भैंसें बेच दीं.
पत्नी ने हर मुश्किल में दिया साथ
शादी के बाद भी जीवन आसान नहीं हुआ. साल 2006 में पत्नी चंदा देवी के साथ उन्होंने नई जिंदगी शुरू की, लेकिन रोजमर्रा के खर्च के लिए उन्हें दिल्ली जाकर लिट्टी-चोखा बेचना पड़ा. उस दौर में उनकी पत्नी ने छह महीने तक एक ही साड़ी पहनकर घर चलाया, लेकिन कभी हिम्मत नहीं हारी और हर कदम पर अपने पति का साथ दिया.
एल्बम से मिली पहचान, बदली किस्मत
खेसारी लाल यादव की जिंदगी में बड़ा मोड़ तब आया जब उनका एल्बम ‘माल भेटाई मेला’ सुपरहिट हुआ. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बना ली. मेहनत और लगन के दम पर आज वे इंडस्ट्री के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं.
आज करोड़ों की संपत्ति के मालिक
आज खेसारी लाल यादव के पास करोड़ों की संपत्ति है. पटना और मुंबई में आलीशान घर, छपरा में पुश्तैनी मकान, महंगी कारें और सोने के गहने उनकी मेहनत की कहानी बयान करते हैं. एक फिल्म के लिए वे 50-60 लाख रुपये फीस लेते हैं और स्टेज शो व गानों से भी अच्छी कमाई करते हैं.
संघर्ष से सफलता तक का यह सफर इस बात की मिसाल है कि मेहनत, धैर्य और परिवार का साथ हो तो कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है.
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