Manvendra Singh UPSC Topper: अपनी शारीरिक कमियों को अपनी कमजोरी बनाने के बजाय, बुलंदशहर के मानवेंद्र सिंह ने उसे अपनी ताकत बना लिया है. जिस उम्र में बच्चे ठीक से चलना और बोलना सीखते हैं, उस उम्र में मानवेंद्र को ‘सेरेब्रल पाल्सी’ जैसी गंभीर बीमारी से जूझना पड़ रहा था. लेकिन आज 24 साल की उम्र में उन्होंने जो मुकाम हासिल किया है, वह लाखों युवाओं के लिए एक प्रेरणा है.
मानवेंद्र ने अपने पहले ही प्रयास में UPSC इंजीनियरिंग सर्विसेज एग्जामिनेशन (ESE) 2025 क्रैक कर लिया है और ऑल इंडिया 112वीं रैंक हासिल की है. आइए इनकी (Manvendra Singh UPSC Topper) जर्नी को करीब से जानते हैं.
Manvendra Singh UPSC Topper: बचपन की चुनौतियां और बीमारी से जंग
मानवेंद्र का जन्म सेरेब्रल पाल्सी के साथ हुआ था, जो शरीर की मांसपेशियों और उनके तालमेल को प्रभावित करती है. उनके लिए बिना सहारे के चलना, बैलेंस बनाना या हाथ से कोई चीज पकड़ना भी बहुत मुश्किल काम था. जब वे बहुत छोटे थे, तभी उनके पिता का साया उनके सिर से उठ गया था. उनका बचपन ननिहाल में बीता. छह महीने की उम्र से ही उनकी लंबी मेडिकल यात्रा शुरू हो गई थी. फिजियोथेरेपी से लेकर आयुर्वेद और होम्योपैथी तक, परिवार ने उन्हें ठीक करने के लिए हर कोशिश की.
Manvendra Singh UPSC Topper: पढ़ाई में शुरू से ही थे अव्वल
शरीर की मुश्किलों के बावजूद मानवेंद्र का दिमाग हमेशा तेज रहा. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान 10वीं और 12वीं, दोनों ही बोर्ड परीक्षाओं में टॉप 10 में जगह बनाई. टीचर और दोस्तों के बीच वे अपनी मेहनत और अनुशासन के लिए जाने जाते थे. इसी मजबूत बुनियाद ने उन्हें भविष्य की बड़ी परीक्षाओं के लिए तैयार किया.
IIT पटना का सफर
स्कूल के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग की राह चुनी और अपने पहले ही प्रयास में JEE परीक्षा पास कर ली. इसमें उन्होंने 63वीं रैंक हासिल की और IIT पटना में एडमिशन ले लिया. हॉस्टल की जिंदगी ने उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर बना दिया. शारीरिक चुनौतियों के बाद भी वे कैंपस में खुद साइकिल चलाकर क्लास जाते, अपना खाना खुद बनाते और कपड़े भी खुद ही धोते थे.
UPSC ESE में पहली बार में ही पाई सफलता
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद मानवेंद्र ने UPSC इंजीनियरिंग सर्विसेज की तैयारी शुरू की. उन्होंने पुराने पेपर्स को सॉल्व करने और अपने बेसिक कॉन्सेप्ट्स को मजबूत करने पर ध्यान दिया. उन्होंने कड़ी मेहनत से अपने पहले ही प्रयास में ऑल इंडिया 112वीं रैंक के साथ भारतीय इंजीनियरिंग सेवा (IES) में अपनी जगह पक्की कर ली.
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