IAS Akshita Gupta Success Story: अक्षिता गुप्ता की कहानी हर छात्र के लिए मोटिवेशन है जो नौकरी, पढ़ाई या जिम्मेदारियों की वजह से अपने सपनों से दूर हो जाते हैं. सुबह से लेकर देर रात तक अस्पताल में ड्यूटी, मरीजों की देखभाल, इमरजेंसी कॉल और बिना आराम के लगातार काम. इसके बाद रात में पढ़ाई करके देश की सबसे कठिन परीक्षा को क्रैक करना आसान नहीं है.
IAS Akshita Gupta Success Story: कौन हैं अक्षिता गुप्ता?
अक्षिता गुप्ता (IAS Akshita Gupta) चंडीगढ़ की रहने वाली हैं. उनके पिता पवन गुप्ता पंचकूला के एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल में प्रिंसिपल हैं. उनकी मां मीना गुप्ता सरकारी स्कूल में मैथ्स की लेक्चरर हैं. घर में पढ़ाई की बात होती थी, इसलिए स्कूल और कॉलेज के दिनों से ही अक्षिता का झुकाव पढ़ाई की ओर रहा.
अक्षिता ने मेडिकल की पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया था कि उन्हें UPSC की परीक्षा देनी है. उन्होंने कॉलेज के तीसरे साल से सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी. MBBS की पढ़ाई आसान नहीं होती, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने रोज थोड़ा थोड़ा समय निकालकर UPSC का सिलेबस समझना शुरू किया.
LBSNAA में IAS अक्षिता गुप्ता
अस्पताल की ड्यूटी में पढ़ाई
डॉक्टर बनने के बाद अक्षिता की अस्पताल में ड्यूटी कई बार 14 घंटे तक चलती थी. दिन भर काम करने के बाद थकान तो होती थी, लेकिन उन्होंने पढ़ाई छोड़ने का मन नहीं बनाया. अस्पताल में मिलने वाले 15 मिनट के ब्रेक में भी वे UPSC की किताबें या नोट्स देख लेती थीं.
रात में पढ़ाई
एक इंटरव्यू में अक्षिता (IAS Akshita Gupta) बताती हैं कि वो दिन में ड्यूटी के बाद रात को पढ़ाई करती थीं. उन्होंने अपनी कमजोर जगहों पर ज्यादा ध्यान दिया और पूरे सिलेबस को जोड़कर पढ़ा. मेहनत रंग लाई और 2020 में पहली ही कोशिश में UPSC क्लियर किया. उनका ऑल इंडिया रैंक 69 आया. अक्षिता पंजाब कैडर में तैनात हैं.
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