BPSC Success Story (सीवान से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट):“मैंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है. जब भैया (करेंट सीवान SP) ने UPSC क्लियर किया तो मुझे उनसे काफी इंस्पिरेशन मिली. उनके काम और उन्हें मिल रहे सम्मान को देखकर मैंने भी सिविल सेवा की तैयारी करने की ठान ली. भैया ने मुझे बताया, तैयारी की शुरुआत कैसे करनी है, कौन-कौन सी किताबें पढ़नी हैं और बेसिक चीजों को मजबूत कैसे करना है. जब भी मैं कभी निराश होती थी या मेरा हौसला टूटता था, भैया हमेशा मुझे मोटिवेट करते थे और आगे बढ़ने की प्रेरणा देते थे.” ये कहना है अभी के सीवान SP पूरन कुमार झा की बहन सपना झा (Sapna Jha BPSC) का. सपना ने तीसरे अटेंप्ट में BPSC में 201वीं रैंक लाकर SDO (अनुमंडल पदाधिकारी) का पद हासिल किया.
राजस्थान में बीता बचपन, UPSC में 3 अटेंप्ट बाकी
सपना झा बिहार के मधुबनी जिले की रहने वाली हैं. सपना तीन भाई-बहन हैं, दो भाईयों में वे इकलौती बहन हैं. उनके पापा निर्भय नारायण झा राजस्थान में भारतीय रेलवे में टेक्निशियन के पद पर कार्यरत थे. अब वे रिटार्यड हो चुके हैं. ऐसे में सभी बच्चों का बचपन राजस्थान में बीता. सपना झा के पिता की पोस्टिंग राजस्थान के सवाई माधोपुर में थी. तीनों बच्चे वहीं के केंद्रीय विद्यालय से पढ़ाई की है.
12वीं के बाद इंजीनियरिंग की डिग्री
12वीं पास करने के बाद सपना झा ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने भाई से ही प्रेरणा लेकर 2018 में ग्रेजुएशन कंप्लीट कर पहले UPSC की तैयारी शुरू की थी. लगातार 3 एटेंप्ट करने के बाद जब उनका UPSC क्लियर नहीं हुआ तो उन्होंने BPSC एग्जाम देने का सोचा. साल 2022 से उन्होंने BPSC की तैयारी शुरू कर दी थी. तीसरे अटेंप्ट में उन्हें सफलता मिली.
भाई की सफलता से मिली सिविल सेवा की प्रेरणा
प्रभात खबर से बातचीत में सपना झा ने बताया, मैं कई बार असफल हुई. कई बार लगा कि शायद अब नहीं हो पाएगा, लेकिन मन में हमेशा एक बात थी कि मुझे यह करना है. अगर आप सही दिशा में मेहनत कर रहे हैं तो सफलता जरूर मिलती है.
पढ़ाई को लेकर पिता का सख्त रवैया
उन्होंने बताया कि उनके पापा शुरू से पढ़ाई को लेकर गंभीर थे. पापा हम तीनों भाई-बहनों को एक साथ बैठाकर पढ़ाते थे. शुरुआत से सपना एक एवरेज स्टूडेंट रही हैं.
UPSC के बाद BPSC को बनाया लक्ष्य
सपना झा ने आगे बताया, शुरुआत UPSC से की थी. लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने BPSC की तैयारी शुरू कर दी थी. यह उनका तीसरा प्रयास था, जिसमें उन्होंने सफलता हासिल कर ली. सपना ने कहा कि इस बार के एग्जाम से उन्हें ज्यादा उम्मीद नहीं थी.
8-12 घंटे पढ़ाई नहीं, लक्ष्य पूरा करना था फोकस
सिविल सेवा की तैयारी में घंटों की पढ़ाई को लेकर उन्होंने कहा, मैंने कभी यह नहीं देखा कि मैं कितने घंटे पढ़ रही हूं. मेरा लक्ष्य रहता था कि जो टारगेट बनाया है, उसे पूरा करना है. उसके लिए जितना समय देना पड़े, देती थी.
मेन्स की तैयारी को दिया ज्यादा टाइम
प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू हर स्टेज की अपनी अलग प्लानिंग होती है. मैंने हर चीज के लिए अलग-अलग तैयारी की थी. जैसे मेंन्स और प्रीलिम्स में ज्यादा देर तक पढ़ाई करनी पड़ी थी. इंटरव्यू में थोड़ा कब समय दिया था. उन्होंने आगे बताया, BPSC में उनका ऑप्शनल विषय इतिहास था. शुरूआत से हिस्ट्री मेरा पसंदीदा सब्जेक्ट रहा है. इसकी तैयारी के लिए बेसिक चीजों को मजबूत करना जरूरी है.
कम्युनल राइट को लेकर BPSC इंटरव्यू में पूछे गए सवाल
सपना झा ने अपने बीपीएससी सिलेक्शन के दौरान पूछे गए सवालों का अनुपात करते हुए बताया, इंटरव्यू में मुझसे बेगुनाही और प्रशासनिक सोच से जुड़े सवाल पूछे गए. एक सवाल में मुझसे पूछा गया कि अगर मुझे SDM बना दिया जाए और क्षेत्र में कम्युनल राइट हो जाए तो मैं कैसे संभालूंगी? इस पर मैंने जवाब दिया, सबसे पहले मैं सभी संबंधित विभागों से को-ऑडिट करूंगी. इसके बाद खुद मौके पर जाकर स्थिति को समझूंगी और समस्या के समाधान के लिए काम करूंगी.
आगे भी करेंगी UPSC की तैयारी
सपना ने असफलता से निराश होने वाले लोगों के लिए कहा, फेलियर देखकर घबराना नहीं चाहिए. अपनी मेहनत को और बेहतर करना चाहिए. अगर प्रयास सही दिशा में है तो सफलता जरूर मिलती है. उन्होंने बताया कि वह आगे यूपीएससी का प्रयास भी करना चाहती हैं.
SP पूरन झा बोले- बचपन से साथ, हर कमजोरी-ताकत की जानकारी थी
बहन की सफलता पर SP पूरन झा ने कहा, कुछ खुशियां ऐसी होती हैं जिन्हें शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता. यह वही खुशी है कि इतने लंबे समय से हमने जो सपना देखा था, जो प्लान किया था, वह आज आखिरकार सफल हो गया है.
हम दोनों के बीच उम्र का अंतर करीब 9 साल है, लेकिन बचपन से ही दोनों ने हर चीज एक-दूसरे से शेयर किया है. खासकर जब से मेरी बहन 10वीं के बाद आगे बढ़ी, तब से हम दोनों हर चीज डिस्कस करते थे. एक-दूसरे की स्ट्रेंथ, कमजोरी और सोच को अच्छी तरह जानते थे.
किताबों से ज्यादा जरूरी सही प्लानिंग
मैंने खुद भी सिविल सेवा की राह चुनी थी. राजस्थान पीसीएस में सिलेक्शन के बाद मैंने UPSC की तैयारी की. इसी दौरान बहन के साथ तैयारी को लेकर लगातार चर्चा होती रहती थी. सिविल सेवा की तैयारी आसान नहीं होती. इसमें मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर संघर्ष करना पड़ता है.
उन्होंने कहा, सिलेबस बहुत बड़ा होता है और समय सीमित होती है. प्री, मेन्स और इंटरव्यू लगातार चलते रहते हैं. अगर एक परीक्षा में असफलता मिलती है तो अगले चरण की तैयारी सामने होती है. यह एक लंबी और लगातार चलने वाली यात्रा है. जब मेरा चयन हुआ था तभी सोचा था कि छोटी बहन का भी UPSC में होना चाहिए. अब मैं भी एक बार फिर प्रयास करना चाहता हूं.
पूरन झा ने आगे बताया, मैंने बहन को सिर्फ पढ़ाई की प्लानिंग नहीं बताई, बल्कि तैयारी के दौरान मानसिक रूप से मजबूत रहने में भी मदद की. मैं ज्यादा नोट्स बनाने में विश्वास नहीं करता था. मैं किताबों को अंडरलाइन करके पढ़ता था. करंट अफेयर्स के लिए न्यूज पेपर के नोट्स बनाता था.
पिता का संघर्ष बना बच्चों की ताकत
पूरन झा ने बताया कि उनके पिता रेलवे में नौकरी करते थे और परिवार को आगे बढ़ाने के लिए काफी संघर्ष किया. करीब 1984-85 के आसपास पापा मधुबनी से राजस्थान गए. वहीं नौकरी की और हम तीनों भाई-बहनों की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से हुई. पिता ने हमेशा बच्चों के सपनों को पूरा करने में साथ दिया. जो करना चाहते थे, उसके लिए पापा ने हमेशा सपोर्ट किया. यही माहौल हमारी सफलता की बड़ी वजह बना.
उन्होंने कहा, नंबर ऑफ आवर्स मायने नहीं रखते. जरूरी है कि आप जो पढ़ रहे हैं, उसे कितनी अच्छी तरह समझ रहे हैं. हमलोग पेज और टॉपिक के हिसाब से लक्ष्य बनाते थे. यह जरूरी है कि आपको पता हो कि आज क्या पूरा करना है.
मां बोलीं- सपने ने खुद पढ़ाई से ये मुकाम हासिल किया है
बच्चों की सफलता पर मां रेणु देवी ने बताया, मैंने हमेशा बच्चों की पढ़ाई को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी. बच्चों को पढ़ाई के अलावा किसी और काम में नहीं लगाया, ताकि उनका पूरा ध्यान अपने लक्ष्य पर रहे. घर और बाहर की जिम्मेदारी मैं खुद संभालती थी.
तीनों बच्चे बचपन से ही पढ़ाई में अच्छे रहे हैं. उनकी आदतें और मेहनत शुरू से ही अलग थीं. उन्होंने अपनी मेहनत से ये मुकाम हासिल किया है. सपने ने ज्यादातर खुद पढ़ाई के जरिए तैयारी की और उसी से ये मुकाम हासिल किया है. तीनों बच्चों की सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए मां ने कहा कि आज का दिन उनके लिए गर्व का पल है.
पिता बोले- इतनी बड़ी सफलता मिलेगी, इसका अंदाजा नहीं था
बेटी के SDM बनने की सफलता पर पिता निर्भय नारायण झा ने कहा, बच्चों को इस मुकाम तक पहुंचाने के लिए परिवार ने हमेशा पढ़ाई को प्राथमिकता दी. उनका मुख्य उद्देश्य यही था कि बच्चे अच्छी शिक्षा हासिल करें और अपने जीवन में आगे बढ़ें. मुझे यह तो भरोसा था कि बच्चे मेहनत करेंगे, लेकिन इतनी बड़ी सफलता मिलेगी, इसका अंदाजा नहीं था. उन्होंने कहा, बच्चे कामयाब हों, यही सोच थी. लेकिन आज जिस मुकाम पर पहुंचे हैं, यह हमारे लिए बहुत खुशी की बात है.
बेटी को दी ईमानदारी से काम करने की सीख
उन्होंने कहा, हम हमेशा बच्चों से कहते थे कि पढ़ाई करो. कई बार बच्चे मन नहीं लगाते हैं, लेकिन इसके लिए घर में माहौल बनाना पड़ता है. हमारे बच्चों ने भी हमारी बात मानी और मेहनत की. हमने तीनों बच्चों की शुरुआत से पढ़ाई पर ध्यान दिया. बच्चों में कभी कोई बड़ा अंतर नहीं देखा. बेटा हो या बेटी, हमने सभी को बराबर अवसर दिया.
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