Ajay Gupta AIR 452: अजय गुप्ता छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक छोटा सा गांव संबलपुरी के रहने वाले हैं. इसी गांव की धूल-मिट्टी में पले-बढ़े एक किसान के बेटे ने आज वह मुकाम हासिल किया है, जो देश के लाखों युवाओं का सपना होता है. अजय गुप्ता ने यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा में 452वीं रैंक हासिल किया है. आइए इनकी सफलता की जर्नी को करीब से जानते हैं.
Ajay Gupta AIR 452: सरकारी स्कूल से एनआईटी तक का सफर
अजय की शुरुआती पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई. उन्होंने अपनी स्कूलिंग पूरी करने के बाद एनआईटी रायपुर (NIT Raipur) जैसे पॉपुलर इंस्टीट्यूट से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की. एनआईटी में पढ़ते हुए उन्होंने न केवल टेक्निकल नॉलेज हासिल किया, बल्कि अपने व्यक्तित्व को भी निखारा. एक किसान परिवार से होने के कारण उन्होंने बचपन से ही जमीन से जुड़ाव और मेहनत की अहमियत को समझा था.
नौकरी की जरूरत और सिविल सर्विस का सपना
अजय जब कॉलेज में थे, उस समय उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी. ऐसे में पढ़ाई पूरी होते ही उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती घर की जिम्मेदारी संभालने की थी. उनके मन में सिविल सर्विस में जाने की इच्छा तो थी, लेकिन घर की स्थिति अच्छी नहीं थी. अजय ने एक एनजीओ (NGO) जॉइन किया. इससे उन्हें काफी फायदा हुआ. नौकरी करने से अजय को आर्थिक सहारा मिला जिससे वे घर और अपनी पढ़ाई का खर्च उठा सके. साथ ही उन्हें समाज की जमीनी समस्याओं को करीब से देखने का मौका मिला. इसी काम के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी जारी रखी.
दादाजी की सीख बनी कामयाबी का मंत्र
हर सफल व्यक्ति के पीछे कोई न कोई प्रेरणा जरूर होती है. अजय के लिए यह प्रेरणा उनके दादाजी थे. उनके दादाजी ने उन्हें एक बहुत ही गहरी और अनमोल बात सिखाई थी. वे अक्सर कहते थे कि अगर ऊपर वाले ने आपको किसी भी तरह की काबिलियत दी है, तो उसका उपयोग केवल अपने स्वार्थ के लिए न करें. अपनी योग्यता का लाभ दूसरों और समाज को भी दें. दादाजी की यही सीख अजय के मन में बैठ गई और उन्होंने ठान लिया कि वे प्रशासन का हिस्सा बनकर लोगों की सेवा करेंगे.
Ajay Gupta AIR 452: पांच साल का लंबा संघर्ष और अनुशासन
यूपीएससी की परीक्षा कोई रातों-रात मिलने वाली सफलता नहीं है. अजय (Ajay Gupta AIR 452) को यह मुकाम हासिल करने में लगभग पांच साल का समय लगा. वे बताते हैं कि वे रोजाना 8 से 10 घंटे पढ़ाई करते थे. पांच साल तक लगातार एक ही लक्ष्य पर टिके रहना आसान नहीं था, लेकिन उनकी निरंतरता ने ही उन्हें जीत दिलाई.
सोशल मीडिया की चकाचौंध से दूरी
आज के दौर में जहां युवा अपना ज्यादातर समय रील और सोशल मीडिया पर बिताते हैं, अजय ने इससे पूरी तरह दूरी बना ली थी. उन्होंने बताया कि तैयारी के दौरान वे सोशल मीडिया से लगभग कटे हुए थे. फेसबुक पर उनकी आखिरी पोस्ट भी कई साल पुरानी थी. उन्होंने मोबाइल का उपयोग केवल जरूरी जानकारी और पढ़ाई के संसाधनों के लिए किया.
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