कानपुर की बेटी बनी SDM, BPSC में रैंक 52, मां का त्याग हुआ सफल

BPSC Success Story: सोनाली की सफलता की कहानी हजारों सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है. उन्होंने वर्ष 2023 से सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की थी और अपने 70वीं CCE परीक्षा में सफलता हासिल की. उन्होंने दूसरे Aspirants को कहा कि मेंटल प्रेशर न लें और तैयारी में अगर जरूरी हो तो सोशल मीडिया की मदद लें.

BPSC Success Story: BPSC 70वीं CCE का रिजल्ट जारी कर दिया है. कानपुर की रहने वाली सोनाली सिंह ने भी इस परीक्षा में सफलता हासिल की है. उन्होंने 52वीं रैंक हासिल की है, अब वे SDM बनेंगी. सोनाली 2023 से सिविल सर्विस की तैयारी कर रही हैं. आइए, जानते हैं संघर्ष से सफलता तक की कहानी.

इंजीनियर पिता का सपना बेटी बने अफसर

सोनाली सिंह कानपुर के एक सामान्य परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनके पिता अभिषेक कुमार लोक निर्माण विभाग (PWD) में चीफ इंजीनियर रह चुके हैं. वहीं उनकी मां अल्का सिंह हाउस वाइफ हैं. सोनाली की पढ़ाई और करियर को संवारने में उनकी मां की भूमिका बेहद अहम रही है.

मां ने पढ़ाई में की मदद

परिवार के अनुसार, अल्का सिंह ने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर पूरा ध्यान दिया. वे स्कूल और कॉलेज से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी से अपडेट रहती थीं. उन्होंने कभी भी बेटी पर घर के कामों का का प्रेशर नहीं डाला और हमेशा उसे अपने लक्ष्य की ओर बढ़ने के लिए मोटिवेट किया.

सोशल मीडिया से दूर नहीं, समझदारी से करें इस्तेमाल

सोनाली सिंह ने एक मीडिया इंटरव्यू में बताया कि उनकी तैयारी में सोशल मीडिया का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा. उनका मानना है कि BPSC, UPSC Aspirant को सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका सही तरीके से यूज करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि आज के समय में कई एजुकेशनल मैटेरियल और जानकारी इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं. ऐसे में सही स्ट्रैटजी के साथ अगर आप इन चीजों का इस्तेमाल करें तो आप कम समय में ज्यादा जानकारी हासिल कर सकते हैं.

एक सोर्स पर भरोसा करें, तनाव से रहें दूर

BPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को सलाह देते हुए सोनाली ने कहा कि किसी भी सब्जेक्ट के लिए एक भरोसेमंद सोर्स चुनना चाहिए और बार-बार किताबें बदलने से बचना चाहिए. एक सोर्स पर भरोसा करें. साथ ही मेंटल प्रेशर से बचने की सलाह दी. तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें, क्योंकि Health is Wealth. अगर कोचिंग से मदद मिल रही है तो जरूर लें, लेकिन यह जरूरी नहीं है कि परीक्षा पास करने का एकमात्र रास्ता कोचिंग ही हो.

माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय

सोनाली सिंह ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है. उनका कहना है कि परिवार के सहयोग और विश्वास ने उन्हें हर कठिन दौर में आगे बढ़ने की ताकत दी. खासकर मां की बहुत बड़ी भूमिका रही. आज उनकी सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि उन सभी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है जो सिविल सेवा में जाने का सपना देख रहे हैं.

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Published by: Shambhavi Shivani

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