70th CCE BPSC Success Story: ‘सफर तो UPSC से शुरू हुआ था, लेकिन 2 अटेंप्ट के बाद मैंने BPSC परीक्षा में बैठने का मन बनाया.’ ये कहना है BPSC 70वीं CCE परीक्षा में 167वीं रैंक हासिल करने वाली सुधा सिंह का. सुधा रोहतास जिले की रहने वाली हैं, उनकी ज्यादातर पढ़ाई गांव या छोटे शहर से हुई है. आज जब उन्होंने इतनी बड़ी सफलता हासिल कर ली है तो घर परिवार के साथ-साथ इलाके और पूरे गांव के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं.
2018 से कर रही हैं सिविल सेवा की तैयारी
सुधा सिंह ने प्रभात खबर से बात करते हुए बताया कि उन्होंने 2018 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी. उसके बाद वे UPSC की तैयारी के लिए दिल्ली चली गई थीं. दिल्ली जाकर उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के दो अटेंप्ट दिए.
कहां से हुई पढ़ाई-लिखाई?
सुधा सिंह बिहार के रोहतास जिले के गांव धरहरा के दिनारा ब्लॉक की रहने वाली हैं. उनके पिता जगनारायण सिंह बेटी की इस उपलब्धि से बेहद खुश हैं. सुधा सिंह की शुरुआती पढ़ाई रांची के सरकारी स्कूल से हुई. उनके पिता रांची में रहकर जॉब करते थे. सुधा ने हायर बिहार में रहकर ही उच्च शिक्षा हासिल की है. इंटर की पढ़ाई के बाद उन्होंने वीर कुंवर सिंह यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया.
बड़े भाई का सपना, बहन बने अफसर
सुधा सिंह ने बताया कि उन्हें सिविल सेवा में आने के लिए उनके बड़े भाई ने प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि भैया का सपना था कि मैं सिविल सेवा में जाऊं. भैया ने हर स्टेज पर मोटिवेट किया. कभी मेरी हिम्मत नहीं टूटने दी.
रिजल्ट देखकर रोने लगीं सुधा
सुधा सिंह को ये सफलता चार सालों के संघर्ष के बाद मिली है. BPSC में तीसरे अटेंप्ट में जाकर उनका सेलेक्शन हुआ है. दूसरे अटेंप्ट में वे इंटरव्यू राउंड तक पहुंचीं थीं, लेकिन फाइनल सेलेक्शन नहीं हो पाया. 70वीं CCE परीक्षा का जब रिजल्ट आया तो पहले उन्हें लग रहा था कि बस किसी तरह हो जाए. लेकिन जब उन्होंने देखा कि उन्हें SDM पद मिला है तो उनकी आंखें नम हो गईं.
गांव की पहली लड़की जो बनेगी SDM
उन्होंने अपने संघर्ष के बारे में बताते हुए कहा कि मेरे लिए ये सब इतना आसान नहीं था. मेरी ज्यादातर पढ़ाई लिखाई गांव से हुई है. भाई के कहने पर जब मैं दिल्ली गई तो मेरी लाइफ ने यूटर्न लिया. मैंने वहां कई हार्डशिप देखे, घर का कंफर्ट छूटा. अब जब मेरा सेलेक्शन BPSC 70वीं CCE परीक्षा में हुआ है तो मैं गांव की पहली लड़की बन गई हूं, जिसने इतनी बड़ी पोस्ट हासिल की है.
लाखों लड़कियों के लिए पेश की मिसाल
सुधा ने कर दिखाया कि साधारण चीजों के साथ भी बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती है. सीमित सुविधाओं के बीच उन्होंने जो मुकाम हासिल किया, वह हर उस लड़की के लिए उम्मीद की किरण है जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखती है.
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