Digital vs Original Marksheet: आजकल बोर्ड और यूनिवर्सिटी के रिजल्ट आने के बाद स्टूडेंट्स को सबसे पहले डिजिटल मार्कशीट मिलती है. कई बार स्टूडेंट्स को समझ नहीं आता कि यह मार्कशीट असली है या सिर्फ टेम्परेरी. वहीं कुछ समय बाद स्कूल या कॉलेज से ओरिजिनल मार्कशीट भी दी जाती है. ऐसे में स्टूडेंट्स के मन में सवाल आता है कि डिजिटल मार्कशीट और ओरिजिनल मार्कशीट (Digital vs Original Marksheet) आखिर क्या फर्क होता है. आइए जानते हैं.
डिजिटल मार्कशीट क्या होती है?
डिजिटल मार्कशीट वह मार्कशीट होती है, जिसे छात्र ऑनलाइन डाउनलोड करते हैं. रिजल्ट जारी होने के तुरंत बाद बोर्ड या यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर यह उपलब्ध हो जाती है. इसमें स्टूडेंट्स के नाम, रोल नंबर, सब्जेक्ट और मार्क्स होते हैं. एडमिशन या फॉर्म भरने में इस मार्कशीट का यूज किया जा सकता है. डिजिटल मार्कशीट की खास बात यह है कि इसे वेबसाइट से PDF फॉर्मेट में डाउनलोड किया जा सकता है. साथ ही रिजल्ट आने के तुरंत बाद मिल जाती है.
ओरिजिनल मार्कशीट क्या होती है?
ओरिजिनल मार्कशीट वह होती है, जो बोर्ड या यूनिवर्सिटी की तरफ से प्रिंटेड और सर्टिफाइड रूप में स्कूल या कॉलेज के माध्यम से दी जाती है. ओरिजिनल मार्कशीट ऑफलाइन (हार्ड कॉपी) में मिलती है. इसमें बोर्ड की मुहर और ऑथराइज्ड सिग्नेचर होते हैं. इस मार्कशीट को ऑफिशियल और प्रमानेंट डॉक्यूमेंट माना जाता है. जॉब, हाइयर एजुकेशन और सरकारी कामों में इसकी जरूरत पड़ती है.
Digital vs Original Marksheet: इन दोनों में क्या अंतर है?
| अंतर | डिजिटल मार्कशीट | ओरिजिनल मार्कशीट |
| कैसे मिलती है? | ऑनलाइन डाउनलोड | स्कूल/कॉलेज से |
| कब मिलती है? | रिजल्ट के तुरंत बाद | कुछ समय बाद |
| फॉर्मेट | PDF या डिजिटल फाइल | प्रिंटेड हार्ड कॉपी |
| यूज | तुरंत एडमिशन के लिए | स्थायी और सरकारी काम के लिए |
| प्रमाणिकता (Authenticity) | QR कोड/डिजिटल साइन | असली मुहर और साइन |
क्या डिजिटल मार्कशीट मान्य होती है?
आज के समय में कई कॉलेज और इंस्टीट्यूट डिजिटल मार्कशीट को भी मान्य मानते हैं, खासकर एडमिशन प्रोसेस के समय पर. लेकिन लंबे समय के लिए या गवर्नमेंट डॉक्यूमेंट के रूप में आमतौर पर ओरिजिनल मार्कशीट की जरूरत पड़ती है.
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