NEET Success Story: तीन बार तुमसे नहीं हो पाएगा…सुनने के बाद ट्रक ड्राइवर की बेटी ने क्रैक किया NEETअसफलता, लोगों के ताने, आर्थिक तंगी और ट्रक ड्राइवर की बेटी होने का संघर्ष, इन सबके बावजूद बिहार के दरभंगा की कायनात ने अपने डॉक्टर बनने के सपने को नहीं छोड़ा. बार-बार मिली नाकामयाबी को उन्होंने अपनी ताकत बनाया और आखिरकार MBBS में एडमिशन हासिल कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों के आगे हालात भी हार मान लेते हैं.
पिता चलाते हैं ट्रक
कायनात खानम दरभंगा जिला के बिरौल प्रखंड के एक छोटे से गांव मारोवारा की रहने वाली हैं. वो एक ऐसे परिवार से आती हैं, जो आर्थिक और सामाजिक दोनों रूप से कमजोर है.
उनके पिता इम्तियाज अहमद खान ट्रक ड्राइवर हैं. कायनता तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं. हमेशा से उनका सपना डॉक्टर बनने का था. बेटी का सपना धीरे-धीरे पिता का भी सपना बन गया. पिता ने दिन-रात मेहनत की ओर ट्रक चलाकर बेटी को पढ़ाया.
ऑनलाइन पढ़ाई में आई दिक्कत, गांव में नेट नहीं था
कायनात की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई उनके नाना-नानी के घर पश्चिम बंगाल से हुई. कोविड के दौरान उन्हें अपने गांव मोरवारा लौटना पड़ा. गांव मे नेटवर्क अच्छा नहीं था, ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कई सारी दिक्कतें आईं. ऐसे में पिता ने दरभंगा शहर में छोटा सा मकान रेंट पर लिया ताकि कायनात को पढ़ाई के लिए बेहतर माहौल दे सकें. कायनात की 11वीं-12वीं की पढ़ाई दरभंगा के एक स्कूल से हुई.
3 बार फेल हुईं कायनात
कायनात के लिए NEET परीक्षा में सफलता हासिल करना इतना आसान नहीं था. वे तीन बार असफल रहीं. हर बार निराशा जरूर होती. बार-बार मिल रही असफलता को देखकर घर वालों ने कहा “पढ़ाई छोड़ दो, तुमसे नहीं हो पाएगा”. लेकिन कायनात ने कभी हार नहीं मानी.
2026 में हो गया पेपर लीक
इस साल जब नीट का पेपर लीक (NEET Paper Leak) हुआ तो कायनात कुछ दिनों के लिए डिप्रेशन में चली गई थीं. लेकिन उनके टीचर ने उन्हें मोटिवेट किया और समझाया कि इसे एक मौके की तरह देखे.
री-नीट में हासिल किया 1407वां स्थान
कायनात के लिए NEET री-एग्जाम वरदान जैसा साबित हुआ. री-नीट में उन्होंने 593 मार्क्स हासिल करके 1407वां स्थान हासिल किया. उनकी इस उपलब्धि से माता-पिता से लेकर पूरा परिवार बहुत खुश है.
कायनात ने सफलता का क्रेडिट माता-पिता को दिया
कायनात ने अपनी सफलता का क्रेडिट अपने माता-पिता और टीचर को दिया. वे हर दिन 12-13 घंटे पढ़ाई करती थीं. वे दूसरे अस्पिरेंट को भी सलाह देती हैं कि डिमोटिवेट न हों और मेहनत करते रहें.
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