Windfall Tax: अस्थिर कच्चे तेल पर सरकार ने बढ़ाया विंडफॉल टैक्स, महीने में दूसरी बार हुई वृद्धि, जानें डिटेल

Windfall Tax: केंद्र सरकार ने भारत से डीजल, पेट्रोल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर को शून्य पर बरकरार रखा गया है. एक आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, नई दरें आज सुबह से प्रभावी हो गयी हैं.

Windfall Tax: अंतर्राष्टीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अस्थिर हैं. पिछले सप्ताह जहां क्रड ऑयल की कीमतों में गिरावट देखने को मिली. वहीं एक्सपर्ट बता रहे हैं कि अगले सप्ताह कीमतें चढ़ सकती हैं. हालांकि, इस बीच केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स को 4,600 रुपये प्रति टन से बढ़ाकर 4,900 रुपये प्रति टन कर दिया. हालांकि, भारत से डीजल, पेट्रोल और विमान ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर लगने वाले अप्रत्याशित लाभ कर को शून्य पर बरकरार रखा गया है. एक आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, नई दरें आज सुबह से प्रभावी हो गयी हैं. यह कर ‘विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क’ (एसएईडी) के रूप में लगाया जाता है. देश में पहली बार एक जुलाई, 2022 को पेट्रोलियम उत्पादों पर अप्रत्याशित लाभ कर लगाया गया था. इसके साथ ही भारत उन देशों में शामिल हो गया जो ऊर्जा कंपनियों के असाधारण मुनाफे पर कर लगाते हैं. पिछले दो सप्ताह में तेल की औसत कीमतों के आधार पर हर पखवाड़े कर दरों की समीक्षा की जाती है.

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15 दिनों में होता है अपडेट

अंतर्राष्ट्रीय कच्चे तेल और उत्पाद की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर विंडफॉल टैक्स में हर 15 दिनों में संशोधन होता है. इससे पहले, महीने के पहले दिन केंद्र सरकार ने घरेलू कच्चे तेल पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में 1300 रुपये प्रति मैट्रिक टन का इजाफा किया गया है. इसके बाद, विंडफॉल टैक्स 4600 रुपये हो गया था. वहीं, 1 दिसंबर को सरकार ने कच्चे पेट्रोलियम पर अप्रत्याशित कर को ₹6,300 प्रति टन से घटाकर ₹5,000 प्रति टन करने की घोषणा की थी. जबकि, जनवरी में सरकार ने राहत देते हुए, विंडफॉल टैक्स को 2300 रुपये प्रति टन से घटाकर 1700 रुपये प्रति टन कर दिया है. वहीं, 15 फरवरी को समीक्षा में सरकार ने घरेलू कच्चे तेल पर विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी की थी. पिछले महीने 100 रुपये प्रति मैट्रिक टन का इजाफा किया गया था.

क्या है विंडफॉल टैक्स

कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के जवाब में भारत ने शुरुआत में जुलाई 2022 में विंडफॉल टैक्स लगाया. यह कर सरकारों द्वारा तब लगाया जाता है जब कोई उद्योग अप्रत्याशित रूप से पर्याप्त मुनाफा कमाता है, जिसका श्रेय आमतौर पर किसी अभूतपूर्व घटना को दिया जाता है. जब वैश्विक बेंचमार्क की दरें 75 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाती हैं तो घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल पर अप्रत्याशित कर लगाया जाता है. डीजल, एटीएफ और पेट्रोल के निर्यात के लिए, लेवी तब लागू होती है जब उत्पाद में दरार आती है, या मार्जिन 20 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाता है. उत्पाद में दरारें या मार्जिन कच्चे तेल (कच्चे माल) की लागत और तैयार पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य के बीच अंतर को दर्शाते हैं. भारत में ईंधन निर्यात में प्रमुख खिलाड़ियों में गुजरात के जामनगर में दुनिया के सबसे बड़े एकल-स्थान तेल रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स का संचालन करने वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और रोसनेफ्ट द्वारा समर्थित नायरा एनर्जी शामिल हैं.

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