सरकारी पंपों को पछाड़ रहे प्राइवेट पंप, आखिर क्यों यहां ₹5 सस्ता मिल रहा पेट्रोल-डीजल?

Fuel Prices in India: प्राइवेट पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल-डीजल 5 रुपये तक सस्ता मिल रहा है. जानें क्यों रिलायंस और नायरा जैसी कंपनियां सरकारी पंपों के मुकाबले कम दाम में तेल बेच रही हैं.

Fuel Prices in India: भारत के फ्यूल मार्केट में इन दिनों एक अनोखा बदलाव देखने को मिल रहा है. जहां हम हमेशा सरकारी पेट्रोल पंपों (IOCL, BPCL, HPCL) को भरोसेमंद और सस्ता मानते थे, वहीं अब रिलायंस-बीपी (Jio-bp) और नायरा एनर्जी जैसे प्राइवेट पंपों पर पेट्रोल-डीजल 1 रुपये से 5 रुपये तक सस्ता मिल रहा है. भारी बचत की वजह से अब लोग धीरे-धीरे प्राइवेट आउटलेट्स की तरफ रुख कर रहे हैं. 

प्राइवेट पंपों पर तेल इतना सस्ता कैसे?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जो तेल सरकारी कंपनियां महंगा बेच रही हैं, वही प्राइवेट कंपनियां सस्ता कैसे दे पा रही हैं? बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, इसका मुख्य कारण है रूस से मिलने वाला सस्ता कच्चा तेल (Crude Oil). यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने रूस से भारी डिस्काउंट पर तेल खरीदना शुरू किया. रिलायंस और नायरा जैसी कंपनियों के पास अपनी बड़ी रिफाइनरीज हैं, जहां वे इस सस्ते कच्चे तेल को प्रोसेस करके मोटा मुनाफा कमा रही हैं. इसी मुनाफे का एक हिस्सा वे अब ग्राहकों को डिस्काउंट के रूप में दे रही हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उनके पास आएं. 

क्या यह सिर्फ मार्केट में कब्जा करने की चाल है?

देखा जाए तो प्राइवेट कंपनियां अभी मार्केट शेयर के मामले में सरकारी कंपनियों के मुकाबले बहुत पीछे हैं.  फिलहाल भारत के 90% मार्केट पर सरकारी कंपनियों का कब्जा है. अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए प्राइवेट रिटेलर्स कैशबैक, लॉयल्टी रिवॉर्ड्स और डिस्काउंट का सहारा ले रहे हैं. खासकर शहरों में रहने वाले लोग और कमर्शियल गाड़ियों वाले, जिन्हें रोज ज्यादा तेल डलवाना पड़ता है, वे 5 रुपये तक की बचत को हाथ से नहीं जाने देना चाहते. 

सरकारी कंपनियां दाम कम क्यों नहीं कर रहीं?

सरकारी ऑयल कंपनियों (PSUs) के लिए कीमतें तय करना सिर्फ बिजनेस नहीं, बल्कि एक राजनीतिक मुद्दा भी है. सरकार नहीं चाहती कि फ्यूल की कीमतों में बार-बार बदलाव से आम जनता का बजट बिगड़े या महंगाई एकदम से बढ़ जाए. इसी वजह से जब इंटेरनाती मार्केट में कच्चे तेल के दाम गिरते हैं, तब भी सरकारी कंपनियां कीमतें उतनी तेजी से नहीं घटातीं. इसके उलट, प्राइवेट कंपनियां बाजार के हिसाब से तुरंत कीमतें घटाकर ग्राहकों को अपनी ओर खींच लेती हैं. 

क्या हमेशा सस्ता मिलेगा प्राइवेट पंप पर तेल?

यहां एक पेंच भी है. प्राइवेट कंपनियों की प्राइसिंग डायनेमिक होती है. यानी जब कच्चा तेल सस्ता होगा, तो ये सबसे पहले दाम गिराएंगी, लेकिन अगर इंटरनेशनल मार्केट में तेल महंगा हुआ, तो ये सरकारी कंपनियों से पहले दाम बढ़ा भी देंगी. इसीलिए कई बार शेल (Shell) जैसे प्रीमियम पंपों पर पेट्रोल सरकारी पंपों से भी महंगा मिलता है. 

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By Soumya shahdeo

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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