वंदे भारत ट्रेन की छत से टपकने लगा पानी, छाता लिए लोको पायलट की तस्वीर वायरल? जानें क्या है सच

25 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक चलने वाली केरल की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाये जाने के एक दिन बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई. इसे हजारों बार देखा गया और व्यापक रूप से साझा किया गया.

रेलवे के एक इंजन में छाता लिए हुए एक लोको पायलट की एक तस्वीर इस दावे के साथ सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा की गई कि केरल में वंदे भारत एक्सप्रेस की पहली यात्रा से पूर्व उसकी छत से बारिश का पानी रिस रहा था.

वायरल मैसेज में क्या किया जा रहा दावा

26 अप्रैल को ट्विटर पर किये एक पोस्ट में लिखा गया था, मोदी की ‘वंदे भारत’ मोदी की तरह एक मुसीबत है. उद्घाटन के पहले दिन, केरल में वंदे भारत की छत से बारिश का पानी रिसने लगा. तस्वीर खुद बोलती है. पोस्ट को दो दिनों में 67,000 से अधिक बार देखा गया, इसे 1,700 से अधिक लाइक मिले और 800 बार रीट्वीट किया गया. कई उपयोगकर्ताओं ने एक ही तस्वीर को एक ही दावे के साथ ट्विटर और फेसबुक पर साझा किया.

25 अप्रैल को केरल में वंदे भारत ट्रेन को दिखाये थे हरी झंडी

25 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम से कासरगोड तक चलने वाली केरल की पहली वंदे भारत एक्सप्रेस को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा हरी झंडी दिखाये जाने के एक दिन बाद यह तस्वीर सोशल मीडिया पर प्रसारित हुई. इसे हजारों बार देखा गया और व्यापक रूप से साझा किया गया.

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फैक्ट चेक ने बताया वायरल मैसेज का सच

पीटीआई के ‘फैक्ट चेक’ में यह बात सामने आयी कि 25 अप्रैल को जब ट्रेन कन्नूर में खड़ी थी तब उसके एक डिब्बे के ‘एसी वेंट’ से पानी का रिसाव हुआ था और रेल अधिकारियों ने 26 अप्रैल को इसकी मरम्मत करा दी थी. रेल इंजन में पानी का कोई रिसाव नहीं हुआ था. बाद की जांच में पता चला कि सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीर 2017 में झारखंड में बनाये गए एक वीडियो का स्क्रीनशॉट थी. पीटीआई की फैक्ट चेक टीम ने फोटो को लेकर ‘गूगल रिवर्स इमेज सर्च’ से अपनी पड़ताल शुरू की. टीम ने पत्रकार सुचेता दलाल द्वारा 9 अगस्त, 2017 को पोस्ट किए गए एक ट्वीट में एक पुराना वीडियो मिला, जिसमें वही लोको पायलट रेल इंजन में रिसते पानी से बचने के लिए छाता पकड़े हुए दिखा.

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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