Crude Oil Price: शुक्रवार, 8 मई को कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें एक बार फिर 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव है. दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की कोशिशें तो चल रही थीं, लेकिन ताजा खबरों ने सबका मूड बिगाड़ दिया. खबर है कि दोनों देशों के बीच फिर से हमलों का दौर शुरू हो गया है, जिससे तेल की सप्लाई रुकने का डर बढ़ गया है.
क्या हो रहा है स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में?
सारा फसाद इस समय स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर टिका है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि उनके तीन नौसैनिक जहाजों (Destroyers) पर ईरानी हमलावरों ने हमला किया. हालांकि, अमेरिकी जहाजों को कोई नुकसान नहीं हुआ, लेकिन जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई छोटी नावें तबाह हो गई हैं. ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक ईरान शांति समझौते पर साइन नहीं करता, तब तक वहां घेराबंदी (Blockade) जारी रहेगी. इसी खींचतान की वजह से कल जो तेल की कीमतें गिरकर 100 डॉलर के नीचे आई थीं, वे आज फिर बढ़ गईं.
तेल के दाम अब कहां तक पहुंच गए हैं?
बाजार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 1.42% की बढ़त के साथ 101.49 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. वहीं, अमेरिका का WTI क्रूड भी 1% से ज्यादा चढ़कर 95.80 डॉलर पर पहुंच गया है. पिछले एक महीने में तेल की कीमतों में 7% की तेजी आई है, लेकिन अगर पिछले तीन महीनों का हिसाब देखें तो यह उछाल लगभग 50% तक पहुंच चुका है. निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि ईरान ने अभी तक अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है.
सोने की कीमतों और डॉलर पर क्या असर पड़ा?
सिर्फ तेल ही नहीं, इस तनाव ने सोने और डॉलर को भी प्रभावित किया है. सुरक्षित निवेश के तौर पर लोग सोने की ओर भाग रहे हैं, जिससे COMEX गोल्ड की कीमतें 4,728 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गई हैं. दूसरी ओर, युद्ध जैसी स्थिति की वजह से अमेरिकी डॉलर (DXY Index) की डिमांड भी बढ़ गई है, जो फिलहाल 98.24 पर ट्रेड कर रहा है. आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो सोना खरीदना महंगा हो जाता है, लेकिन ग्लोबल टेंशन की वजह से फिलहाल दोनों के दाम ऊपर की तरफ भाग रहे हैं.
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