Trade Deal: डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड डील से कुछ एशियाई देशों को राहत, चीन को करना पड़ेगा इंतजार

Trade Deal: डोनाल्ड ट्रंप के नए व्यापार समझौतों से जापान, फिलिपीन और इंडोनेशिया को आंशिक शुल्क राहत मिली, जबकि चीन, भारत, दक्षिण कोरिया जैसे देशों को अब भी ऊंचे शुल्कों का सामना करना पड़ रहा है. चीन के साथ वार्ता की समयसीमा बढ़ सकती है. वहीं, भारत की प्रगति कृषि नीति पर टिकी है. अमेरिका की बढ़ी हुई शुल्क दरों का असर एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ना तय है. ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति वैश्विक व्यापार को बदल रही है.

Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान, फिलिपीन और इंडोनेशिया के साथ नए व्यापार समझौतों की घोषणा की है. इन समझौतों का उद्देश्य अमेरिका में बढ़ते आयात शुल्क के प्रभाव को कुछ हद तक कम करना है. जापान के साथ हुए करार के तहत अब वहां से आने वाले उत्पादों पर 15% शुल्क लगेगा, जो पहले प्रस्तावित 25% के मुकाबले कहीं कम है. इससे टोयोटा और होंडा जैसी कंपनियों को बड़ा फायदा होगा. वहीं फिलिपीन और इंडोनेशिया पर अब 19% शुल्क लगेगा, जबकि पहले यह 20 और 32% तक प्रस्तावित था.

चीन के साथ वार्ता अब भी अधर में

चीन के साथ अमेरिका की व्यापार वार्ता को अभी भी अंतिम रूप नहीं मिला है. हालांकि, अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिए हैं कि 12 अगस्त की समयसीमा को बढ़ाया जा सकता है, ताकि दोनों देश वार्ता के लिए अधिक समय पा सकें. डोनाल्ड ट्रंप ने भी इशारा किया है कि वह जल्द ही चीन की यात्रा कर सकते हैं. इससे संकेत मिलता है कि अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में एक नया दौर शुरू हो सकता है, लेकिन फिलहाल चीन को किसी राहत की उम्मीद नहीं है.

भारत पर 26% शुल्क का खतरा कायम

भारत की स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है. अमेरिका के साथ उसकी बातचीत कृषि क्षेत्र को लेकर अटकी हुई है, जो भारत का अत्यधिक संरक्षित क्षेत्र है. विशेषज्ञों के अनुसार, भारत पर 26% आयात शुल्क का खतरा बना हुआ है. अप्रैल से अमेरिका में प्रवेश करने वाले अधिकतर उत्पादों पर 10% का आधार शुल्क पहले से लागू है, जिससे भारत जैसे देशों के निर्यातकों पर अतिरिक्त बोझ पड़ा है.

दक्षिण कोरिया, म्यांमा और अन्य देश अब भी इंतजार में

अब तक दक्षिण कोरिया, थाइलैंड, म्यांमा और लाओस जैसे देशों को कोई व्यापारिक राहत नहीं मिली है. इनमें से दक्षिण कोरिया पर 25% और म्यांमा तथा लाओस पर 40% शुल्क प्रस्तावित है. इन देशों के साथ किसी समझौते की घोषणा न होना उन्हें आर्थिक असमंजस की स्थिति में डाल रहा है.

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ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति और वैश्विक प्रभाव

डोनाल्ड ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत व्यापार समझौतों में स्पष्ट रूप से भेदभाव दिख रहा है. जिन देशों ने अमेरिका के साथ सहयोग बढ़ाया, उन्हें आंशिक छूट मिली, जबकि अन्य को अब भी ऊंचे शुल्कों का सामना करना पड़ रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की नीतियां एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि को प्रभावित कर सकती हैं.

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लेखक के बारे में

By Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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