2008 के आर्थिक संकट के बाद सबसे बुरा रहा वैश्विक शेयर बाजारों के लिए यह सप्ताह

कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ने से वैश्विक अर्थव्यस्था पर पड़ने वाले असर की आशंका से सहमे हुए हैं वैश्विक शेयर बाजार

वाशिंगटन : कोरोना वायरस के संक्रमण से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर की आशंका की वजह से वैश्विक शेयर बाजारों में 2008 के वैश्विक आर्थिक संकट के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. अमेरिका के शेयर सूचकांक एसएंडपी 500 में गुरुवार को 4.4 फीसदी की गिरावट रही. यह इसकी 2011 के बाद की सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट है. डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज भी गुरुवार को करीब 1200 अंक गिरकर बंद हुआ.

एसएंडपी 500 ने महज एक सप्ताह पहले अपना सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ था. यह उस स्तर से अब तक 12 फीसदी नीचे गिर चुका है. इन दोनों सूचकांकों में यह सप्ताह 2008 के आर्थिक संकट के दौरान अक्टूबर के बाद का सबसे बुरा होने जा रहा है. विश्लेषकों का कहना है कि कोरोना वायरस का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका ने निवेशकों की धारणा खराब की है.

पिछले दो सप्ताह से कई कंपनियां यह चेतावनी दे चुकी है कि इस संक्रमण के कारण उनके तिमाही परिणाम पर असर पड़ सकता है. कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण चीन में कारखानों का उत्पादन बंद है. इससे आपूर्ति शृंखला में व्यवधान पड़ने की आशंकाएं ठोस हुई हैं तथा उपभोक्ता भी खरीदारी से बच रहे हैं.

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By Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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