Sugar Prices: पीटीआई ने उद्योग सूत्रों के हवाले से जो खबर दी है उसके अनुसार, मिल पर कीमत घटने का असर थोक बाजार में लगभग तुरंत दिखता है, लेकिन खुदरा कीमतों में बदलाव होने में समय लगता है.
मिल में भाव कम होने का असर खुदरा बाजार पर क्यों नहीं दिख रहा ?
इसकी बड़ी वजह खुदरा विक्रेताओं के पास मौजूद पुराना स्टॉक है. जिन दुकानदारों ने पहले अधिक कीमत पर चीनी खरीदी थी, वे उसे कम कीमत पर बेचकर नुकसान नहीं उठाना चाहते. इसलिए जब तक उनका पुराना स्टॉक खत्म नहीं होता, वे चीनी को पुरानी दरों पर ही बेचते रहेंगे.
आमतौर पर एक खुदरा विक्रेता के पास चीनी के 10 से 15 बैग होते हैं. हर बैग का वजन 50 किलोग्राम होता है. जब दुकानदार कम कीमत पर नया स्टॉक खरीदेगा, तभी खुदरा कीमत में भी उसी के अनुसार गिरावट आने की उम्मीद है. चीनी उद्योग के एक सूत्र ने पीटीआई को बताया, खुदरा कीमतों में बदलाव दिखाई देने में कम से कम 10 दिन लगते हैं.
घरेलू बाजार में आएगी 3-3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी
मिल पर चीनी की कीमतों में गिरावट सरकार के उस फैसले के बाद आई है, जिसमें उन मिलों को निर्यात के लिए रिफाइंड की गई चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी गई है. अनुमान है कि अगले दो महीनों में करीब 3 से 3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में आएगी.
थोक उपभोक्ताओं पर भी स्टॉक रखने की पाबंदी
इसके अलावा, बड़े पैमाने पर चीनी का इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं ने भी अपना स्टॉक कम किया है. जिन उपभोक्ताओं के पास 15 दिन से ज्यादा समय से चीनी का स्टॉक था, उन्होंने सरकार के नए नियमों के पालन के लिए स्टॉक घटाया है.
एक सितंबर से महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं को लगातार 15 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी.
हर मिल की ओर से थोक उपभोक्ताओं को बेची जाने वाली मासिक चीनी की मात्रा की भी जांच की जाएगी. इसमें सीधे या डीलर के माध्यम से की गई बिक्री दोनों शामिल होंगी.
मिल, थोक और खुदरा कीमतों में कितना अंतर?
चीनी उद्योग के सूत्रों के मुताबिक, एक्स-मिल और थोक कीमतों के बीच आमतौर पर 2 से 3 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर होता है. वहीं, मिल और खुदरा कीमतों के बीच 7 से 8 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर सामान्य माना जाता है.
सरकार ने उठाए कई कदम
कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं. निर्यात पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है. इसके अलावा, थोक ग्राहकों और डीलरों के लिए स्टॉक रखने के नियमों को भी सख्त किया गया है.
केंद्र सरकार ने कीमतें बढ़ाने के लिए मिलों को जिम्मेदार ठहराया है. सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.
हालांकि, वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है. देश में चीनी की सालाना घरेलू मांग करीब 280-285 लाख टन आंकी गई है.
मिल पर चीनी की कीमत कितनी गिर गई है? ▼
मिल पर चीनी की कीमत करीब 30 प्रतिशत गिरकर 47 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है.
18 अगस्त को चीनी की मिल कीमत कितनी थी? ▼
18 अगस्त को मिल पर चीनी की कीमत 67 रुपये प्रति किलोग्राम थी.
खुदरा बाजार में चीनी सस्ती क्यों नहीं हुई? ▼
खुदरा विक्रेताओं के पास पहले से महंगी कीमत पर खरीदा हुआ स्टॉक है. वे उसे कम कीमत पर बेचकर नुकसान नहीं उठाना चाहते. नया स्टॉक कम कीमत पर आने के बाद खुदरा भाव में बदलाव हो सकता है.
खुदरा कीमतों में बदलाव आने में कितना समय लग सकता है? ▼
चीनी उद्योग के एक सूत्र के मुताबिक, खुदरा कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन लग सकते हैं.
घरेलू बाजार में कितनी रिफाइंड चीनी आने का अनुमान है? ▼
अगले दो महीनों में करीब 3 से 3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में आने का अनुमान है.
एक सितंबर से थोक उपभोक्ताओं के लिए क्या नियम बदलेगा? ▼
महीने में 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ता लगातार 15 दिन से ज्यादा समय तक स्टॉक नहीं रख सकेंगे.
एक्स-मिल और खुदरा कीमतों में सामान्य अंतर कितना होता है? ▼
उद्योग सूत्रों के मुताबिक, मिल और खुदरा कीमतों के बीच आमतौर पर 7 से 8 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर होता है.
