SEBI का फैसला- पुराने फिजिकल शेयरों को डिजिटल करने के लिए मिलेगी 1 साल की छूट, हटाई गई LOC की शर्त

SEBI Physical Share Transfer 2026: SEBI ने पुराने फिजिकल शेयरों को डिजिटल करने के लिए खास विंडो खोली है. जानिए अब बिना किसी लेटर के सीधे आपके डीमैट अकाउंट में शेयर कैसे आएंगे और 150 दिन का काम मात्र 30 दिन में कैसे होगा.

SEBI Physical Share Transfer 2026: SEBI का यह फैसला उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जिनके पुराने शेयर सर्टिफिकेट्स सालों से अलमारी के किसी कोने में धूल फांक रहे थे. आसान शब्दों में कहें तो अब आपके पुराने कागजी शेयरों को डिजिटल (Demat) कराना न सिर्फ आसान हो गया है, बल्कि इसमें लगने वाला समय भी अब नाममात्र रह गया है.

पुराने अटके शेयरों का क्या होगा?

अगर आपके पास ऐसे फिजिकल शेयर हैं जो 2019 से पहले किसी कागज की कमी या कानूनी अड़चन की वजह से डीमैट नहीं हो पाए थे, तो अब उसकी फिक्र छोड़ दीजिये क्योंकि SEBI ने अब 5 फरवरी 2026 से 4 फरवरी 2027 तक एक साल की स्पेशल विंडो खोली है. इस दौरान आप अपने पुराने रिजेक्ट हुए या अधूरे पड़े कागजी शेयरों को फिर से प्रोसेस कराकर अपने नाम पर करवा सकते हैं.

150 दिन का काम अब 30 दिन में?

अभी तक शेयरों को डिजिटल कराने का प्रोसेस बहुत लंबा और थकाऊ था. पहले कंपनी एक लेटर ऑफ कन्फर्मेशन (LOC) भेजती थी, फिर उसे डिपॉजिटरी के पास जमा करना पड़ता था. इस भागदौड़ में करीब 5 महीने (150 दिन) निकल जाते थे. अब SEBI ने इस LOC के चक्कर को ही खत्म कर दिया है. 2 अप्रैल 2026 से कम्पनियां और रजिस्ट्रार सीधे आपके डीमैट अकाउंट में शेयर क्रेडिट कर देंगे. इससे आपका काम अब सिर्फ 30 दिनों में हो जाएगा.

निवेशकों को क्या बड़ा फायदा मिलेगा?

इस बदलाव से न सिर्फ समय बचेगा, बल्कि धोखाधड़ी और कागजों के खोने का डर भी खत्म हो जाएगा. सीधे क्रेडिट होने से बिचौलियों का रोल कम होगा और प्रोसेस ट्रांसपेरेंट बनेगा. यह कदम उन लोगों के लिए सबसे बड़ी राहत है जो सालों से अपनी ही संपत्ति (Property) पाने के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे.

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लेखक के बारे में

By Soumya shahdeo

सौम्या शाहदेव प्रभात खबर डिजिटल में बिजनेस कंटेंट राइटर हैं. वह शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, टैक्स, सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और रोजमर्रा की आर्थिक खबरों को सरल और सटीक भाषा में पाठकों तक पहुंचाती हैं. उनका फोकस ऐसी खबरें लिखने पर रहता है जो सीधे आम लोगों की जिंदगी और जेब पर असर डालती हैं.

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