RBI के आदेश के बाद सेविंग खाते से पैसे निकाल रहे लोग, जानें कहां कर रहे निवेश

RBI: हाल के दिनों में बैंकों के सेविंग खाता और चालू खाता में जमा रुपये में कमी दर्ज की गयी है. जबकि, फिक्स्ड डिपॉजिट में जमा राशि बढ़ गयी है.

RBI: देश के शीर्ष बैंक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) के द्वारा हाल ही में मैद्रिक नीति समीक्षा की बैठक का आयोजन किया गया था. इस बैठक में आरबीआई ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया. हालांकि, इसके बाद भी बैंकों के द्वारा ग्राहकों को उच्चे दर पर लोन दिया जा रहा है.

बैंकों में ब्याज दर ज्यादा होने के कारण अब लोग अपना पैसा बचत खाता (Saving Bank Account) या चालू खाता (Current Bank Account) में रखने से कतरा रहे हैं. बैंकों के ग्राहक अपने पैसे खाता से निकालकर सावधि जमा में निवेश कर रहे हैं. इससे सीधे रुप से चालू और बचत खातों में जमा होने वाली राशि में कमी आई है.

उद्योग मंडल फिक्की और भारतीय बैंक संघ (IBA) द्वारा जारी एक सर्वे रिपोर्ट में बताया गया है कि बुनियादी ढांचा, कपड़ा और रसायन जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक ऋण मांग में निरंतर वृद्धि देखी गई है. खाद्य प्रसंस्करण और धातु लोहा एवं इस्पात में भी पिछले छह महीनों में दीर्घकालीन कर्ज वितरण में तेजी देखी गई है.

फिक्की-आईबीए के 17वें दौर के सर्वे के अनुसार, बुनियादी ढांचे में ऋण प्रवाह में वृद्धि देखी जा रही है. सर्वे में 67 प्रतिशत प्रतिभागियों ने दीर्घकालिक ऋण में वृद्धि का संकेत दिया है, जबकि पिछले दौर में यह आंकड़ा 57 प्रतिशत था.

सर्वेक्षण में कहा गया है कि अगले छह महीनों में गैर-खाद्य उद्योग क्षेत्र में कर्ज में वृद्धि देखने को मिल सकती है. सर्वे में शामिल करीब 42 प्रतिशत प्रतिभागियों को उम्मीद है कि गैर-खाद्य उद्योग में कर्ज में वृद्धि 12 प्रतिशत से अधिक होगी. जबकि पिछले दौर में 36 प्रतिशत ने यह संभावना जतायी थी. इसके अनुसार, ऊंची ब्याज दरों को देखते हुए लोगों का झुकाव सावधि जमा की ओर है. सर्वेक्षण के मौजूदा दौर में आधे से अधिक प्रतिभागी बैंकों (57 प्रतिशत) ने कुल जमा में बचत या चालू खाता जमा की हिस्सेदारी में कमी दर्ज की गयी. वहीं सावधि जमा में तेजी आई है.

सर्वेक्षण में कहा गया है कि संपत्ति की गुणवत्ता के संबंध में 75 प्रतिशत बैंकों ने पिछले छह महीनों में अपनी गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) के स्तर में कमी दर्ज की है, जबकि पिछले चरण में 90 प्रतिशत बैंकों ने ऐसा बताया था. इसमें कहा गया कि सार्वजनिक क्षेत्र के 90 प्रतिशत बैंकों ने एनपीए स्तर में कमी का हवाला दिया है, जबकि निजी क्षेत्र के 80 प्रतिशत बैंकों ने एनपीए में गिरावट की बात कही है.

सर्वेक्षण के अनुसार, मौजूदा चरण में लगभग 54 प्रतिशत बैंकों को लगता है कि सकल एनपीए अगले छह महीनों में तीन-चार प्रतिशत के बीच रहेगा.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Digital Media Journalist having more than 2 years of experience in life & Style beat with a good eye for writing across various domains, such as tech and auto beat.

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >