बिना ऑफिस आए 6 साल तक उठाई सैलरी, अब हुआ खुलासा

Salary Without Work:सोचिए कैसा रहेगा बिना ऑफिस गए अगर सैलरी मिलते रहे तो, जिंदगी कितनी सोर्टेड रहेगी ना. ऐसा ही एक मामला सामने आया है. दुनिया का एक ऐसा शख्स है जो अपने ऑफिस एक दो दिन नहीं बल्कि 6 साल तक नहीं गया लेकिन पूरे महीने की सैलरी लेता रहा.

Salary Without Work: हम लोग हर दिन ऑफिस जाते है कि सैलरी मिलती रहे, एक दिन भी छुट्टी लेते है तो हमारी सैलरी कट जाती है. लेकिन आज हम आजको जिस शख्स के बारे में बताने जा रहे है वो पूरे 6 साल तक ऑफिस नहीं गया लेकिन उसे सैलरी मिलता रहा.

अनोखी घटना

स्पेन के कैडिज शहर का एक शख्स जोआक्विन गार्सिया छह साल तक ऑफिस नहीं गया, फिर भी उसे सैलरी मिलती रही. जोआक्विन गार्सिया के बिना किसी मेहनत के हर महीने करीब 6 साल तक उनके खाते में सैलरी के पैसे आते थे. ये अनोखी घटना तब सामने आईं, जब उसकी कंपनी ने उसे 20 साल की सेवा के लिए पुरस्कृत करने का फैसला किया.

दरअसल जोआक्विन गार्सिया कैडिज में एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में सुपरवाइजर के पद पर कार्यरत था. उसका काम प्लांट की देखरेख करना था, लेकिन पिछले 6 साल से वो ऑफिस नहीं गया.

31 लाख रुपये की सैलरी मिलती रही

गार्सिया को सालाना 37,000 यूरो (लगभग 31 लाख रुपये) की सैलरी मिलती रही. लंबे समय तक उसकी अनुपस्थिति पर किसी का ध्यान नहीं गया. स्थानीय प्रशासन और जल कंपनी दोनों ने एक-दूसरे पर उसकी निगरानी की जिम्मेदारी डाल दी, जिसके चलते ये सब कुछ हुआ.

साल 2010 में डिप्टी मेयर जॉर्ज ब्लास फर्नांडिज ने गार्सिया को 20 साल की निष्ठावान सेवा के लिए पुरस्कार देने की योजना बनाई. फिर जब उसकी खोज शुरू हुई, तो पता चलता है कि वो तो सालों से गायब है.

मामला अदालत तक पहुंचा

मामला अदालत तक पहुंचा पूछताछ में गार्सिया ने कोई ठोस जवाब नहीं दिया. उनके वकील ने दावा किया कि वह कार्यस्थल पर उत्पीड़न (बुलिंग) का शिकार हुए थे और नौकरी खोने के डर से चुप रहे.
अदालत ने इस मामले में गार्सिया के खिलाफ फैसला सुनाया और उन पर 30,000 डॉलर (लगभग 25 लाख रुपये) का जुर्माना लगाया. ये उनकी टैक्स के बाद एक साल की सैलरी के बराबर था.

Also Read: हरे निशान के साथ खुला मार्केट, देखें क्या रहे मेजर कारण

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Shailly Arya

मैं एक बिजनेस पत्रकार हूं और फिलहाल प्रभात खबर में काम कर रही हूं. इससे पहले मैंने इकोनॉमिक टाइम्स, दैनिक भास्कर और ABP न्यूज़ जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया है. मुझे कुल मिलाकर 1.5 साल से ज्यादा का अनुभव है. फाइनेंसियल लिटरेसी के बारे में हर किसी को पता होना चाहिए. शेयर बाज़ार हो या म्यूचुअल फंड, मेरा मकसद है कि हर आम इंसान को समझ में आए कि उसका पैसा कैसे काम करता है और कैसे बढ़ता है. मैं मानती हूं जानकारी तभी काम की होती है जब वो समझ में आए. इसलिए मैं लाती हूं बिज़नेस की बड़ी ख़बरें, आसान शब्दों में और आपके लिए. आइए, बिजनेस की दुनिया को थोड़ा और आसान बनाएं साथ मिलकर.

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >