Rupee vs Dollar: मंगलवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय रुपया दबाव में नजर आया और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 14 पैसे टूटकर 92.42 पर पहुंच गया. अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 92.35 पर खुला था, लेकिन जल्द ही गिरकर 92.42 तक आ गया. इससे पहले सोमवार को रुपया 92.28 पर बंद हुआ था, जिससे साफ है कि एक दिन में रुपये में कमजोरी बढ़ी है.
कच्चे तेल की महंगाई से बढ़ा दबाव
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी हुई है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 102 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने का सीधा असर रुपये पर पड़ता है. तेल की कीमतें बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ता है और डॉलर की मांग तेज हो जाती है, जिससे रुपया कमजोर होता है. यही वजह है कि मौजूदा हालात में रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी वजह
रुपये में गिरावट का एक बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली भी है. सोमवार को एफआईआई ने 9,300 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे, जिससे बाजार से डॉलर का आउटफ्लो बढ़ा. घरेलू शेयर बाजार में भी इसका असर दिखा और सेंसेक्स-निफ्टी शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ खुले. इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर फैसले को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों को सतर्क बना दिया है.
कुल मिलाकर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की निकासी और वैश्विक अनिश्चितता. ये तीनों वजहें फिलहाल रुपये को कमजोर बना रही हैं. आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय हालात और केंद्रीय बैंकों के फैसले इसकी दिशा तय करेंगे.
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