Home Lone Guide : घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है कि कई प्रमुख बैंक 7.10% जैसी आकर्षक शुरुआती दरों पर लोन दे रहे हैं. हालांकि, सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है, लोन की कुल लागत कई अन्य कारकों पर निर्भर करती है.
| बैंक | शुरुआती ब्याज दर (प्रति वर्ष) |
| बैंक ऑफ इंडिया | 7.10% से शुरू |
| यूनियन बैंक ऑफ इंडिया | 7.15% से शुरू |
| SBI (भारतीय स्टेट बैंक) | 7.25% से शुरू |
| पंजाब नेशनल बैंक (PNB) | 7.25% से शुरू |
| HDFC बैंक | 7.75% से शुरू |
लोन लेने से पहले इन 4 चेकपॉइंट्स को न भूलें
- सिबिल (CIBIL) स्कोर की ताकत : याद रखें कि विज्ञापन में दिखाई गई सबसे कम ब्याज दर केवल उन लोगों को मिलती है जिनका सिबिल स्कोर 750 या 800 से ऊपर होता है. आपका रीपेमेंट रिकॉर्ड जितना साफ होगा, बैंक आपसे उतना ही कम ब्याज वसूलेगा. 700 से कम स्कोर होने पर ब्याज दर बढ़ सकती है या लोन रिजेक्ट भी हो सकता है.
- प्री-पेमेंट पेनल्टी (Pre-payment Penalty) : अगर भविष्य में आपके पास एकमुश्त पैसा आता है और आप लोन समय से पहले बंद करना चाहते हैं, तो बैंक आपसे पेनल्टी वसूल सकते हैं.
- फ्लोटिंग रेट: आमतौर पर आरबीआई के नियमों के अनुसार फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन पर कोई प्री-पेमेंट चार्ज नहीं लगता.
- फिक्स्ड रेट: यहां बैंक चार्ज लगा सकते हैं. लोन एग्रीमेंट साइन करने से पहले इसे जरूर चेक करें.
- ऑफर्स और छिपे हुए खर्च (Processing Fees) : फेस्टिव सीजन या विशेष ऑफर्स के दौरान बैंक प्रोसेसिंग फीस माफ कर देते हैं. लोन लेने से पहले केवल ब्याज न देखें, बल्कि फाइल चार्ज, लीगल फीस और वैल्यूएशन फीस की भी तुलना करें. कभी-कभी कम ब्याज देने वाला बैंक प्रोसेसिंग फीस में ज्यादा पैसा वसूल लेता है.
- लोन की अवधि (Tenure) का सही चुनाव : ईएमआई (EMI) कम रखने के चक्कर में 30 साल जैसा लंबा समय चुनना “लोन ट्रैप” साबित हो सकता है.
- लंबी अवधि: मासिक बोझ कम, लेकिन कुल ब्याज मूलधन से भी ज्यादा हो सकता है.
- छोटी अवधि: मासिक बोझ ज्यादा, लेकिन आप लाखों रुपये का ब्याज बचा सकते हैं.
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