Ready To Eat Meal: LPG संकट ने भारतीयों के खाने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है. रसोई गैस की अनिश्चितता और सप्लाई में देरी के कारण अब लोग घंटों किचन में खड़े रहने के बजाय रेडी-टू-ईट (तैयार खाने) को गले लगा रहे हैं. ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon के ताजा आंकड़ों ने इस चौंकाने वाले बदलाव की पुष्टि की है.
महानगरों ही नहीं, छोटे शहरों में भी पैकेज्ड मील की डिमांड
गैस सिलेंडरों की किल्लत का असर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है. हैदराबाद और चेन्नई के साथ-साथ पणजी और सोनीपत जैसे छोटे शहरों में भी नूडल्स, स्नैक्स और डिब्बाबंद खाने की मांग में 15% से 20% का उछाल आया है. लोग अब प्लान्ड कुकिंग के बजाय उन विकल्पों को चुन रहे हैं जिन्हें मिंटों में तैयार किया जा सके. इसी बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियों ने अब खास Ready to Eat स्टोर्स भी ऑनलाइन शुरू कर दिए हैं.
क्यों खाली हो रहे हैं गैस सिलेंडर?
इस पूरे संकट की जड़ें वेस्ट एशिया (Middle East) में छिड़े तनाव से जुड़ी हैं. भारत अपनी जरूरत की 60% LPG बाहर से मंगाता है, जिसका रास्ता फिलहाल युद्ध जैसे हालात की वजह से बाधित है.
- मार्च के शुरुआती हफ्तों में घरेलू गैस की खपत में 17.7% की भारी गिरावट आई है.
- फरवरी के मुकाबले मांग में लगभग 26% की कमी दर्ज की गई है.
सरकार की कोशिश घरेलू रसोई को प्राथमिकता
पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि स्थिति गंभीर है, लेकिन आम जनता के चूल्हे जलते रहें, इसके लिए रिफाइनरियों को घरेलू उत्पादन बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं. कमर्शियल उपयोग (होटल और रेस्तरां) के लिए सप्लाई में कटौती की गई है ताकि आम घरों तक सिलेंडर पहुंच सके.
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