Oil Price Today: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य तकरार के बाद इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर 92 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं. दरअसल, मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बाद दोनों देशों के बीच हमले रुकने से ब्रेंट क्रूड 3% गिरकर सात हफ्ते के निचले स्तर (91.45 डॉलर) पर आ गया था. लेकिन बुधवार, 10 जून को हालात फिर बदल गए.
तेल की कीमतें अचानक क्यों बढ़ीं?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास ईरान द्वारा अमेरिका के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराए जाने का दावा किया गया. इसके जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्देश पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के एयर डिफेंस और रडार साइट्स पर आत्मरक्षा में हवाई हमले किए. इस जवाबी कार्रवाई के तुरंत बाद कच्चे तेल के दामों में तेजी आ गई. बुधवार सुबह ब्रेंट क्रूड 0.77% की बढ़त के साथ 92.51 डॉलर और अमेरिकी वेस्ट टैक्सस इंटरमीडिएट (WTI) 1.27% बढ़कर 89.31 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करने लगा.
ईरान का इस पर क्या रिएक्शन रहा?
अमेरिकी हमलों के पलटवार में ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने बुधवार तड़के बहरीन में मौजूद अमेरिकी पांचवें नौसैनिक बेड़े (U.S. Fifth Fleet) पर ड्रोन से हमला बोल दिया. ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिकी जेट्स ने जास्क, सिरिक और केश्म जैसे इलाकों को निशाना बनाया है, जिससे वहां के पानी के टैंक और कम्युनिकेशन टावर को नुकसान पहुंचा है. इस ताजा टकराव ने दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता को और मुश्किल बना दिया है.
ग्लोबल मार्केट पर इसका क्या असर होगा?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे अहम एनर्जी सप्लाई रूट है, जहां से दुनिया का एक-चौथाई क्रूड ऑयल और LNG गुजरता है. इस रूट पर ईरान के ब्लॉक और अमेरिकी पाबंदियों के कारण सप्लाई का संकट गहरा गया है. यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) का अनुमान है कि इस जंग की वजह से साल 2026 में दुनिया का तेल उत्पादन घटकर 99 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) रह सकता है, जो 2025 में 106.1 मिलियन bpd था. हालांकि, चीन द्वारा मई में तेल आयात 29% घटाने से कीमतों पर थोड़ा कंट्रोल जरूर बना हुआ है.
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