तेल संकट: अब ऑफिस जाने और हवाई सफर पर लग सकती है लगाम!

ग्लोबल तेल संकट से निपटने के लिए आईईए ने वर्क फ्रॉम होम और हवाई यात्रा घटाने जैसे 10 उपाय सुझाए हैं. होर्मुज रास्ता बंद होने से भारत की सप्लाई पर भारी दबाव है.

दुनिया भर में तेल की सप्लाई चेन चरमरा गई है. ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँचा दिया है. भारत जैसे देश के लिए यह खतरे की घंटी है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का 88% तेल बाहर से मंगाते हैं. हालात इतने गंभीर हैं कि अब एक्सपर्ट्स घर से काम करने और सफर कम करने की सलाह दे रहे हैं.

क्यों बढ़ी भारत की टेंशन ?

दुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% हिस्सा ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के रास्ते गुजरता था, जो अब लगभग ठप है. भारत के लिए यह रास्ता ‘लाइफलाइन’ जैसा है क्योंकि

  • हमारा 50% कच्चा तेल इसी रास्ते से आता है.
  • हमारी 85-90% एलपीजी (रसोई गैस) की सप्लाई यहीं से होती है.
  • यही वजह है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल के दाम भले न बढ़े हों, लेकिन रसोई गैस ₹60 महंगी हो चुकी है.

तेल बचाने के 10 बड़े सुझाव: वर्क फ्रॉम होम की वापसी?

आईईए (IEA) ने सरकारों और आम लोगों के लिए 10 ऐसे तरीके सुझाए हैं जिससे तेल की खपत कम की जा सके

  • ज्यादा वर्क फ्रॉम होम: हफ्ते में 3 दिन घर से काम करने से तेल की खपत में 20% तक की कमी आ सकती है.
  • गाड़ी की रफ्तार कम करें: हाईवे पर स्पीड लिमिट 10 किमी प्रति घंटा घटाने से काफी ईंधन बच सकता है.
  • हवाई सफर में कटौती: बिजनेस ट्रिप्स और गैर-जरूरी हवाई यात्राओं को कम करने की सलाह दी गई है.
  • पब्लिक ट्रांसपोर्ट: निजी कारों के बजाय बस और मेट्रो का ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है.

क्या है आगे का रास्ता ?

आईईए का कहना है कि जब तक होर्मुज का रास्ता साफ नहीं होता, तब तक बाजार में स्थिरता नहीं आएगी. संकट से निपटने के लिए सदस्य देशों ने अपने ‘इमरजेंसी स्टॉक’ से 40 करोड़ बैरल तेल जारी किया है, जो एजेंसी के इतिहास में सबसे ज्यादा है. भारत जैसे देशों के लिए फिलहाल ‘बचत’ ही सबसे बड़ा हथियार है ताकि अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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