सरकारी नौकरी से नहीं मिली संतुष्टि, शुरू किया स्टार्टअप और बना डाला 150 करोड़ की कंपनी

Success Story : सरकारी नौकरी छोड़ खड़ा किया ₹150 करोड़ का ब्रांड! जानिए चंडीगढ़ के डॉ. हिमांशु गांधी के स्टार्टअप 'मदर स्पर्श' की सफलता की कहानी, जिन्होंने शॉर्टकट के बजाय चुना बरगद जैसा मजबूत रास्ता.

Success Story : आज के दौर में जहां लोग एक अदद सरकारी नौकरी पाने के लिए सालों-साल मेहनत करते हैं, वहीं कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें अपनी सुरक्षा से ज्यादा अपने सपनों और आइडिया पर भरोसा होता है. ऐसी ही एक कहानी है चंडीगढ़ के रहने वाले डॉ. हिमांशु गांधी की. उन्होंने अपने बिजनेस आइडिया पर भरोसा जताते हुए सरकारी सेक्टर में एक सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव (प्रशासनिक) पोजीशन को हंसते-हंसते अलविदा कह दिया.

शुरुआत में उनके इस फैसले ने परिवार वालों की टेंशन जरूर बढ़ा दी थी, क्योंकि समाज में सरकारी नौकरी को सुरक्षा और प्रतिष्ठा की गारंटी माना जाता है. लेकिन हिमांशु को किसी शॉर्टकट की तलाश नहीं थी, वे एक ऐसा बिजनेस खड़ा करना चाहते थे जो बरगद के पेड़ की तरह मजबूत और दीर्घकालिक हो. इसी सोच के साथ जन्म हुआ प्रीमियम बेबी केयर ब्रांड ‘मदर स्पर्श’ (Mother Sparsh) का.

मार्केट के इस बड़े ‘गैप’ को पहचाना

खास बात यह है कि डॉ. हिमांशु ने इस कंपनी की शुरुआत सिर्फ एक इमोशनल पेरेंट होने के नाते नहीं की, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी कमर्शियल स्ट्रेटेजी (व्यावसायिक रणनीति) थी.

उन्होंने भारतीय बाजार में एक बड़ा वैक्यूम (खालीपन) देखा. बाजार में बहुत सारे विदेशी और बड़े ब्रांड्स तो थे, लेकिन कोई भी ऐसा प्रीमियम भारतीय ब्रांड नहीं था जो विशेष रूप से भारत के बदलते मौसम, यहां के वातावरण और भारतीय बच्चों की बेहद संवेदनशील त्वचा (Sensitive Skin) को ध्यान में रखकर उत्पाद तैयार करे.

हिमांशु का मानना था कि बेबी केयर कोई ऐसा मार्केट नहीं है जहां माता-पिता सिर्फ आकर्षक पैकेजिंग, चकाचौंध या तेज खुशबू देखकर जल्दबाजी में खरीदारी कर लें. यहां सबसे ज्यादा जरूरत सुरक्षा और विश्वसनीयता की होती है.

शॉर्टकट के बजाय चुना ‘बरगद’ जैसा पारंपरिक रास्ता

विज्ञापनों और मार्केटिंग के चकाचौंध भरे शॉर्टकट अपनाने के बजाय हिमांशु ने डॉक्टरों के सुझाए वैज्ञानिक तरीकों और पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक घरेलू नुस्खों (आयुर्वेद और प्रकृति) को आपस में मिलाया.

कंपनी की इस सोच को उसके ब्रांडिंग एलिमेंट्स में भी देखा जा सकता है. ब्रांड का नाम ‘मदर स्पर्श’, इसका लोगो और इसका गहरा हरा (Deep Green) रंग बहुत सोच-समझकर चुना गया. यह गहरा हरा रंग प्रकृति, स्थिरता (Sustainability) और एक बरगद के पेड़ की तरह लंबी उम्र का प्रतीक है.

विज्ञापनों पर करोड़ों बहाने के बजाय अपनाया व्यावहारिक रास्ता

एक बेहद कड़े मुकाबले वाले बेबी केयर सेगमेंट में कदम रखना आसान नहीं था, वो भी तब जब शुरुआत में हिमांशु के पास कोई भारी-भरकम बजट या फंडिंग नहीं थी. वे पूरी तरह से अपनी पर्सनल सेविंग्स (व्यक्तिगत बचत) पर निर्भर थे. महंगे टीवी विज्ञापनों पर पैसा पानी की तरह बहाने के बजाय उन्होंने एक बहुत ही व्यावहारिक (Practical) रास्ता चुना.

कंपनी ने सीधे अस्पतालों और नए माता-पिता (New Parents) तक पहुंच बनाई. माउथ-पब्लिसिटी की ताकत: उन्होंने नए माता-पिता को सीधे अपने प्रोडक्ट्स के सैंपल दिए ताकि वे उन्हें खुद आजमा सकें. इन पेरेंट्स से मिले वास्तविक और सकारात्मक फीडबैक ने ब्रांड के लिए ‘माउथ-पब्लिसिटी’ (एक से दूसरे तक तारीफ पहुंचना) का काम किया. विज्ञापनों की जगह इस जमीनी भरोसे ने ब्रांड की साख को मजबूत किया.

आज ₹150 करोड़ से ज्यादा का है रेवेन्यू

जमीन से जुड़कर काम करने की यह अनूठी स्ट्रेटेजी पूरी तरह कामयाब रही. देखते ही देखते ‘मदर स्पर्श’ ने देश के प्रीमियम और टॉक्सिन-फ्री (केमिकल रहित) बेबी केयर स्पेस में अपनी एक मजबूत और अलग पहचान बना ली.

वित्तीय वर्ष 2024-25 तक कंपनी ने 150 करोड़ रुपये से ज्यादा का रेवेन्यू पार कर लिया है. भविष्य में कंपनी नए सेक्टर्स और नए बाजारों (जैसे ऑफलाइन और इंटरनेशनल मार्केट्स) में विस्तार के साथ 40 से 50 फीसदी की भारी ग्रोथ का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है.

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Published by: Abhishek Pandey

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