कौन हैं लीना गांधी तिवारी जिन्होंने मुंबई में खरीदा सबसे महंगा मकान? जानें उनकी संपत्ति

Leena Gandhi Tewari Net Worth: यूएसवी फार्मा की चेयरपर्सन लीना गांधी तिवारी ने मुंबई के वर्ली में 703 करोड़ रुपये में देश का सबसे महंगा मकान खरीदा है. वे भारत की 45वीं सबसे अमीर महिला हैं. यह सौदा नमन जाना प्रोजेक्ट के तहत हुआ, जिसमें दो डुप्लेक्स फ्लैट शामिल हैं. लीना एक परोपकारी और प्रभावशाली उद्यमी हैं, जिनकी पहचान रणनीतिक नेतृत्व और समाजसेवा के लिए भी होती है. वे मीडिया से हमेशा दूर रहती हैं.

Leena Gandhi Tewari Net Worth: लीना गांधी तिवारी अभी खूब चर्चा का विषय बनी हुई हैं. सोशल और डिजिटल मीडिया रियल एस्टेट में उनका नाम धूम मचा रहा है. लोग यह जानना चाह रहे हैं कि ये लीना गांधी तिवारी कौन हैं, जिनके नाम की इतनी चर्चा हो रही है? ये अचानक सुर्खियों में क्यों छा गईं? हम आपको बता देते हैं कि लीना गांधी तिवारी का नाम चर्चा का विषय इसलिए बना हुआ है, क्योंकि उन्होंने मुंबई के वर्ली इलाके में देश का सबसे महंगा मकान खरीदा है. उन्होंने इस मकान को करीब 703 करोड़ रुपये में खरीदा है. अब सवाल यह भी पैदा होता है कि ये लीना गांधी तिवारी कौन हैं, जिनके पास इतना पैसा आ गया कि उन्होंने इतने कीमती घर को खरीदा है? उनके पास कितनी संपत्ति है? आइए, इसके बारे में जानते हैं.

फार्मा कंपनी यूएसवी की चेयरपर्सन हैं लीना गांधी तिवारी

लीना गांधी तिवारी यूएसवी प्राइवेट लिमिटेड की चेयरपर्सन हैं और भारत की सबसे धनी महिलाओं में से एक हैं. उन्होंने मुंबई के वर्ली इलाके में स्थित समंदर के किनारे बने ‘नमन जाना’ प्रोजेक्ट के दो डुप्लेक्स फ्लैट्स 703 करोड़ रुपये में खरीदी है. यह सौदा भारत का अब तक का सबसे महंगा रिहायशी डील माना जा रहा है. भारत की अग्रणी दवा कंपनी यूएसवी प्राइवेट लिमिटेड मुख्य रूप से डायबिटीज, कार्डियोलॉजी और बायोसाइंसेस से जुड़ी दवाओं और उत्पादों को बनाती है. लीना गांधी तिवारी का नाम देश की सबसे अमीर और प्रभावशाली महिला उद्योगपतियों में जाना जाता है.

लीना गांधी तिवारी का नेटवर्थ

फोर्ब्स के अनुसार, 29 मई 2025 तक लीना तिवारी की रियल-टाइम नेटवर्थ करीब 3.9 बिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 32,500 करोड़ रुपये है. वह दुनिया की 964वीं सबसे धनी व्यक्ति और भारत की 45वीं सबसे धनी महिला हैं. उनकी संपत्ति का मुख्य स्रोत यूएसवी प्राइवेट लिमिटेड है, जिसकी स्थापना उनके दादा विठ्ठल बालकृष्ण गांधी ने 1961 में की थी. कंपनी डायबिटीज और हृदय रोगों की दवाओं, बायोसिमिलर, इंजेक्टेबल्स, और सक्रिय फार्मास्युटिकल सामग्री (एपीआई) में विशेषज्ञता रखती है, जिसकी वार्षिक आय करीब 511 मिलियन डॉलर यानी करीब 4,840 करोड़ रुपये है.

लीना गांधी तिवारी की सैलरी

लीना गांधी तिवारी की सैलरी के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं.है। चूंकि यूएसवी एक निजी कंपनी है और लीना इसकी चेयरपर्सन हैं. उनकी आय मुख्य रूप से कंपनी के मुनाफे, डिविडेंड और उनकी हिस्सेदारी से आती है. फार्मास्युटिकल सेक्टर के विशेषज्ञों के अनुसार, उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा कंपनी की हिस्सेदारी और रणनीतिक निवेशों से आता है, न कि निश्चित वेतन से.

मुंबई में महंगे घर की खरीद

लीना तिवारी ने मुंबई के वर्ली में 639 करोड़ रुपये में दो समुद्र के सामने लग्जरी डुप्लेक्स अपार्टमेंट खरीदे, जो भारत का अब तक का सबसे महंगा रिहायशी संपत्ति सौदा है. ये अपार्टमेंट नमन जाना नामक 40 मंजिला प्रीमियम टावर की 32वीं से 35वीं मंजिल पर हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 22,572 वर्ग फुट है. प्रति वर्ग फुट की कीमत 2.83 लाख रुपये से अधिक है. स्टांप ड्यूटी और जीएसटी के रूप में 63.9 करोड़ रुपये अतिरिक्त भुगतान किए गए, जिससे कुल लागत 703 करोड़ रुपये हो गई. यह सौदा मुंबई के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में बढ़ती मांग को दर्शाता है.

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भारत की परोकारी महिला उद्यमी हैं लीना गांधी तिवारी

67 साल की लीना गांधी तिवारी ने मुंबई विश्वविद्यालय से बी.कॉम और बोस्टन विश्वविद्यालय से एमबीए किया है. वह मीडिया से दूरी बनाए रखती हैं और परोपकारी कार्यों में सक्रिय रहती हैं. साल 2019 में उन्होंने 34 करोड़ रुपये का दान देकर हुरुन इंडिया फिलैंथ्रॉपी लिस्ट में तीसरा स्थान प्राप्त किया. लीना गांधी तिवारी की 3.9 बिलियन डॉलर की नेटवर्थ, यूएसवी की सफलता और 703 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड तोड़ संपत्ति खरीद उन्हें भारत के सबसे प्रभावशाली उद्यमियों में से एक बना दिया. उनकी रणनीतिक नेतृत्व शैली और सामाजिक योगदान उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाते हैं.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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