मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट पेश किया

Jammu & Kashmir Budget 2026: मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के लिए ₹1.27 लाख करोड़ का बजट पेश किया, जिसका लक्ष्य बुनियादी ढांचे और निवेश के जरिए क्षेत्र का आधुनिकीकरण करना है. राजस्व की कमी और भारी खर्चों की चुनौतियों के बावजूद, यह बजट सतत विकास और आर्थिक स्थिरता का एक नया खाका पेश करता है.

Jammu & Kashmir Budget 2026: शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर की राजनीति और आर्थिक दिशा में एक बड़ा अध्याय जुड़ गया. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वित्त मंत्री के तौर पर विधानसभा में 1.27 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया. यह बजट सिर्फ कागजों पर लिखी संख्या नहीं है, बल्कि अगले एक साल के लिए जम्मू-कश्मीर की तरक्की का खाका (Blueprint) है.

एक आधुनिक जम्मू-कश्मीर का सपना

मुख्यमंत्री ने बड़े ही भरोसे के साथ कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य जम्मू-कश्मीर को एक आधुनिक और आर्थिक रूप से मजबूत क्षेत्र बनाना है. उन्होंने जोर दिया कि यह बजट निवेश और नए आइडिया (Innovation) को बढ़ावा देने वाला है. उनके शब्दों में, “यह बजट हमें उज्ज्वल भविष्य की ओर ले जाने वाला एक दिशा-सूचक (Compass) है.”

पैसे का गणित: कहां से आएगा और कहां जाएगा?

बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य की आर्थिक सेहत की एक ईमानदार तस्वीर भी पेश की.

  • अपनी कमाई कम: जम्मू-कश्मीर की अपनी कमाई (टैक्स और अन्य माध्यमों से) बजट की कुल जरूरतों का केवल 25% ही पूरा कर पाती है.
  • सैलरी और पेंशन का बोझ: बजट का एक बड़ा हिस्सा यानी करीब 60%, सरकारी कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और पुराने कर्जों को चुकाने में चला जाता है.
  • बचत पर जोर: मुख्यमंत्री ने साफ किया कि सरकार अब फालतू खर्चों पर कैंची चला रही है और कर्ज को काबू में रखने के लिए कड़े कदम उठा रही है.

केंद्र का सहारा और बुनियादी ढांचा

अब्दुल्ला ने मुश्किल वक्त में केंद्र सरकार की मदद को भी सराहा. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर को विशेष सहायता योजनाओं का लाभ मिल रहा है. इस पैसे का इस्तेमाल मुख्य रूप से तीन जगहों पर होगा:

  • बुनियादी ढांचा: नई सड़कें और पुल बनाना.
  • बिजली: पानी से बिजली बनाने वाले प्रोजेक्ट्स (Hydro projects) में तेजी लाना.
  • आपदा प्रबंधन: बाढ़ प्रभावित इलाकों की सुरक्षा के इंतजाम करना.

बजट की 3 सबसे बड़ी चुनौतियां

  • राजस्व बढ़ाना: अपनी कमाई को 25% से ऊपर ले जाना एक बड़ा टास्क है.
  • कर्ज प्रबंधन: कर्ज की स्वीकृत सीमा के भीतर रहना.
  • रोजगार और निवेश: सरकारी खर्चों के बीच विकास के लिए पैसा बचाना.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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