ईरान ने जोड़ा हाथ, कहा- ‘शुक्रिया इंडिया! अब और मदद मत भेजना’, भारतीयों के प्यार ने दुनिया को चौंकाया

Iran Embassy Bank Account: भारतीयों के इस बेमिसाल प्यार और समर्थन को देखते हुए अब भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने एक बेहद भावुक संदेश जारी किया है. दूतावास ने उन सभी बैंक खातों और क्यूआर (QR) कोड को बंद कर दिया है, जिनके जरिए आर्थिक मदद ली जा रही थी.

Iran Embassy Bank Account: मुश्किल वक्त में दोस्त ही दोस्त के काम आता है, और भारत ने एक बार फिर ईरान के साथ अपनी इसी पुरानी दोस्ती को साबित किया है. अमेरिका और इजरायल के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच, जब ईरान आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा था, तब भारत के कोने-कोने से लोगों ने अपनी सामर्थ्य से बढ़कर मदद भेजी.

भारतीयों के इस बेमिसाल प्यार और समर्थन को देखते हुए अब भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने एक बेहद भावुक संदेश जारी किया है. दूतावास ने उन सभी बैंक खातों और क्यूआर (QR) कोड को बंद कर दिया है, जिनके जरिए आर्थिक मदद ली जा रही थी. ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब और सहायता भेजने की जरूरत नहीं है, क्योंकि भारत की जनता ने पहले ही उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा सहयोग कर दिया है.

भावुक संदेश: ‘अब और पैसे भेजने की जरूरत नहीं’

ईरान ने अपने आधिकारिक बयान में लिखा, “भारत के लोगों द्वारा दिए गए सराहनीय सहयोग और अटूट समर्थन के लिए हम दिल से आभारी हैं. हम सूचित करते हैं कि वे बैंक खाते, जो आर्थिक सहायता के लिए जारी किए गए थे, अब बंद कर दिए गए हैं. कृपया अब किसी भी खाते में पैसे न भेजें.”

यह संदेश केवल एक सूचना नहीं, बल्कि उस सम्मान का प्रतीक है जो भारत के लोगों ने ईरान के प्रति दिखाया है. विशेष रूप से कश्मीर से आई तस्वीरों ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया, जहां लोगों ने केवल पैसे ही नहीं, बल्कि सोना-चांदी और यहां तक कि अपने घरों के कीमती पीतल और तांबे के बर्तन भी ईरान के नाम कर दिए.

कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक: त्याग की बेमिसाल कहानियां

मदद की ये कहानियां दिल को छू लेने वाली हैं. कश्मीर में मासूम बच्चियों ने अपने कानों की बालियां उतार दीं, तो अनगिनत बच्चों ने अपनी बरसों की जमा-पूंजी वाली ‘गुल्लकें’ दूतावास को सौंप दीं. एक बेहद दिलचस्प किस्सा एक शख्स का सामने आया, जिसने अपनी मुर्गी को ईरान की मदद के लिए दान किया. उसने सीधे मुर्गी नहीं भेजी, बल्कि उसकी नीलामी की, जिससे 1.25 लाख रुपये इकट्ठा हुए और उसने पूरी रकम दान कर दी.

ईरानी दूतावास ने एक बुजुर्ग महिला की तस्वीर साझा करते हुए बताया कि कैसे उसने अपने पुरखों की आखिरी निशानी के तौर पर रखे गहने भी ईरान की हिमायत में दे दिए. भारत से मिला यह चंदा केवल करोड़ों रुपयों का आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह उस जज्बे की कहानी है जहां एक आम हिंदुस्तानी ने दूसरे देश की तकलीफ को अपनी तकलीफ समझा. अब जबकि ईरान ने डोनेशन बंद करने का फैसला किया है, तो यह उनकी गरिमा और भारत के प्रति आभार को दर्शाता है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

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अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

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शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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