भारतीय शेयर बाजार ने मंगलवार को कारोबार की शुरुआत गिरावट के साथ की. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर फिर बढ़ी टेंशन ने कच्चे तेल की कीमतों को ऊपर रखा है. इससे महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी और ग्लोबल मार्केट का मूड भी कमजोर रहा. इसका असर घरेलू बाजार पर भी दिखा.
शुरुआती कारोबार में BSE सेंसेक्स 194.70 अंक यानी 0.25% गिरकर 78,347.74 पर पहुंच गया. वहीं NSE निफ्टी 50 में 44.05 अंक यानी 0.18% की गिरावट रही और यह 24,539.75 पर कारोबार करता दिखा.
बाजार पर तेल की टेंशन का असर क्यों?
HDFC Securities के हेड ऑफ प्राइम रिसर्च देवरश वकील के मुताबिक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने ग्लोबल बाजारों में महंगाई की चिंता फिर बढ़ा दी है. इस हफ्ते अमेरिका में CPI के आंकड़े भी आने हैं, इसलिए निवेशक सतर्क नजर आ रहे हैं. अमेरिकी बाजारों में भी सोमवार को रिकॉर्ड ऊंचाई से गिरावट देखने को मिली. S&P 500, Dow Jones और Nasdaq तीनों कमजोर होकर बंद हुए और इनकी लगातार दो हफ्ते की तेजी थम गई.
रिपोर्टिंग के समय अमेरिकी बाजारों की स्थिति:
| इंडेक्स | स्तर | बदलाव |
| Dow Jones | 53,961.20 | -13.79 (-0.03%) |
| S&P 500 | 7,753.11 | -4.53 (-0.06%) |
| Nasdaq | 26,605.36 | -85.26 (-0.32%) |
कच्चे तेल और सोने में क्या हुआ?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अभी कोई ठोस समझौता नहीं हुआ है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान से मुआवजे की मांग के बाद जल्द समाधान की उम्मीद कमजोर हुई है.
रिपोर्टिंग के समय:
- ब्रेंट क्रूड: 87.64 डॉलर, 0.08 डॉलर नीचे
- कच्चा तेल: 82.14 डॉलर, 0.01 डॉलर ऊपर
- सोना: 4,416.33 डॉलर, 24.99 डॉलर यानी 0.57% ऊपर
तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर महंगाई की चिंता पर पड़ता है. इसी वजह से निवेशक फिलहाल जोखिम लेने में सावधानी बरत रहे हैं.
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निफ्टी के लिए अब कौन-सा लेवल अहम है?
Axis Direct के हेड ऑफ रिसर्च राजेश पालविया के अनुसार, निफ्टी का रुख तब तक सावधानी वाला रह सकता है, जब तक इंडेक्स 24,700-24,730 के रेजिस्टेंस जोन के ऊपर मजबूती से नहीं निकलता. अगर निफ्टी इस स्तर को पार कर लेता है तो 24,850 की ओर बढ़ सकता है. वहीं नीचे की तरफ 24,500-24,450 अहम सपोर्ट जोन है. इसके टूटने पर इंडेक्स 24,300 के स्तर तक फिसल सकता है. हालांकि, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर कोई सकारात्मक कूटनीतिक खबर आती है तो कच्चे तेल का जोखिम कम हो सकता है और बाजार में तेज राहत वाली तेजी भी देखने को मिल सकती है.
घरेलू अर्थव्यवस्था से क्या संकेत मिले?
ग्लोबल दबाव के बावजूद घरेलू बिजनेस एक्टिविटी में मजबूती के संकेत मिले हैं. जुलाई 2026 में भारत में 13.979 करोड़ ई-वे बिल जेनरेट हुए, जो सालाना आधार पर 5.98% ज्यादा हैं. यह अब तक का दूसरा सबसे ज्यादा मासिक आंकड़ा है. फिलहाल बाजार की दिशा पर ग्लोबल एनर्जी अपडेट और कंपनियों के तिमाही नतीजों का असर बना हुआ है. इस बीच Adani Enterprises के शेयर शुरुआती कारोबार में 3,015.30 रुपये पर पहुंच गए, जो 5.30 रुपये यानी 0.18% की बढ़त है. यह तेजी अमेरिकी डिस्ट्रिक्ट कोर्ट द्वारा गौतम और सागर अडानी के खिलाफ आपराधिक आरोप खारिज किए जाने के बाद आई.
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