पहली बार रेलवे को मिला स्वदेश निर्मित अल्युमीनियम मालवाहक रेक, जानें इसकी खासियत

मालवाहक रेक को बेस्को लिमिटेड वैगन डिवीजन और अल्युमीनियम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को ने तैयार किया है. यह रेक पहले की तुलना में हल्का है, लेकिन इसकी क्षमता अधिक माल ढुलाई की है. रेलवे के अनुसार, यह रेक मौजूदा स्टील रेक की तुलना में 180 टन हल्का है.

रेलवे को पहली बार स्वदेशी निर्मित अल्युमीनियम मालवाहक रेक मिला है. जिसे ओडिशा के भुवनेश्वर से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. आइये इसकी खासियत के बारे में जानें.

पहले की तुलना में हल्का, माल ढुलाई की क्षमता अधिक

यह रेक पहले की तुलना में हल्का है, लेकिन इसकी क्षमता अधिक माल ढुलाई की है. रेलवे के अनुसार, यह रेक मौजूदा स्टील रेक की तुलना में 180 टन हल्का है, जिसके परिणामस्वरूप समान दूरी के लिए गति में वृद्धि तो होती ही है, बिजली की खपत भी कम होती है. यह पारंपरिक रेक की तुलना में प्रति ट्रिप 180 टन अतिरिक्त पेलोड ले जा सकता है.

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रखरखाव की लागत कम

कटाव प्रतिरोधी होने के कारण, इसके रखरखाव की लागत कम होगी. रेलवे ने कहा कि नये रेक का रीसेल वैल्यू 80 प्रतिशत है और सामान्य रेक की तुलना में यह 10 साल अधिक चलता है, हालांकि, इसकी विनिर्माण लागत 35 प्रतिशत अधिक है, क्योंकि ऊपरी ढांचा पूर्ण रूप से अल्युमीनियम की होती है.

आठ से 10 टन कार्बन उत्सर्जन में आयेगी कमी

इस रेक के कारण इसके सेवाकाल के दौरान आठ से 10 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आयेगी यानी केवल एक रेक के वैगन से कार्बन उत्सर्जन में कुल 14,500 टन की कमी आयेगी. रेली मंत्री ने कहा, इन वैगन से कार्बन उत्सर्जन में 14500 टन की कमी आयेगी. ये क्षरण रोधी वैगन कम ऊर्जा खपत करते हैं, लेकिन इनकी माल ढोने की क्षमता अधिक है. ये शतप्रतिशत रिसाइकिल करने योग्य हैं और ये वैगन 30 साल बाद भी यथावत बने रहेंगे. ये वैगन जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में हमें सक्षम बनाएंगे.

बेस्को लिमिटेड वैगन डिवीजन और हिंडाल्को ने तैयार किया नया वैगन

मालवाहक रेक को बेस्को लिमिटेड वैगन डिवीजन और अल्युमीनियम क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हिंडाल्को ने तैयार किया है. हिंडाल्को ने बताया, रेलवे आगामी सालों में एक लाख वैगन शामिल करने की योजना बना रहा है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में सालाना 25 लाख टन की कमी आयेगी. हिंडाल्को के मुताबिक मालगाड़ी के इस नये रेक से एक बार में 180 टन अधिक भार की ढुलाई की जा सकेगी और इसके क्षरण रोधी होने से रखरखाव खर्च में कमी आयेगी. कंपनी ने कहा कि इस वैगन के विनिर्माण में कहीं भी वेल्डिंग का इस्तेमाल नहीं किया गया है.

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By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

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शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

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