India-US Trade Deal : भारतीय शेयर बाजार के लिए 'गेम चेंजर', GDP में 80 bps तक की बढ़त संभव

India-US Trade Deal: अक्टूबर 2024 से अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से लगभग 34 अरब डॉलर की निकासी की है, जो उभरते बाजारों (EMs) में सबसे अधिक है. रिपोर्ट का मानना है कि यह रुख अब पूरी तरह बदल सकता है.

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापार समझौते ने भारतीय शेयर बाजार में एक नई जान फूंक दी है. प्रमुख ब्रोकरेज फर्म ‘एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग’ (Antique Stock Broking) की एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यह डील भारतीय इक्विटी के लिए एक बड़े ‘बूस्टर’ के रूप में काम करेगी. पिछले 15 महीनों से बाजार पर जो अनिश्चितता का साया मंडरा रहा था, वह अब हटता नजर आ रहा है.

विदेशी निवेश (FPI) की वापसी की उम्मीद

अक्टूबर 2024 से अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय बाजार से लगभग 34 अरब डॉलर की निकासी की है, जो उभरते बाजारों (EMs) में सबसे अधिक है. रिपोर्ट का मानना है कि यह रुख अब पूरी तरह बदल सकता है.

  • बड़ी हिस्सेदारी: भारत में कुल FPI परिसंपत्तियों (Assets Under Custody) का लगभग 41% हिस्सा अमेरिका से आता है.
  • आकर्षक वैल्यूएशन: भारतीय बाजारों का प्रीमियम अब अपने दीर्घकालिक औसत के करीब है, जिससे अमेरिकी निवेशकों के लिए फिर से खरीदारी का यह सही समय बन गया है.

किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

रिपोर्ट में उन क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां विदेशी निवेश बढ़ने से तेजी आ सकती है.

  • हाई FPI ओनरशिप वाले सेक्टर्स: रियल एस्टेट, टेलीकॉम, ट्रांसपोर्टेशन, फाइनेंशियल सर्विसेज और हेल्थकेयर.
  • अंडरवेट सेक्टर्स: कैपिटल गुड्स, आईटी सर्विसेज और पावर यूटिलिटीज जैसे क्षेत्रों में FPIs फिलहाल कम निवेशित हैं, जहां अब आवंटन बढ़ने और री-रेटिंग की संभावना है.
  • ओवरवेट सेक्टर्स: ब्रोकरेज फर्म फाइनेंशियल, कैपिटल गुड्स, डिफेंस और कंज्यूमर डिस्क्रीशनरी सेक्टर्स पर दांव लगाने की सलाह दे रही है.

मैक्रो इकोनॉमी पर प्रभाव: GDP और रुपया

यह समझौता केवल शेयर बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की व्यापक अर्थव्यवस्था (Macro outlook) को भी मजबूती देगा.

  • निर्यात को सुरक्षा: टैरिफ में कमी से लगभग 50 अरब डॉलर के निर्यात पर जोखिम कम हो गया है. टेक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण, मशीनरी, रसायन, प्लास्टिक और कृषि जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इससे सीधा लाभ मिलेगा.
  • GDP में उछाल: रिपोर्ट के अनुसार, इस डील से भारत की नॉमिनल GDP ग्रोथ में 50 से 80 बेसिस पॉइंट्स (0.5% – 0.8%) की बढ़ोतरी हो सकती है.
  • मजबूत रुपया: पूंजी प्रवाह (Capital inflows) बढ़ने से निकट भविष्य में भारतीय रुपया (INR) अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत हो सकता है.

समझौते की मुख्य बातें


हालांकि डील की आधिकारिक बारीकियां अभी पूरी तरह सामने नहीं आई हैं, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ स्पीक’ पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

  • टैरिफ में भारी कटौती: भारतीय वस्तुओं पर लगने वाले ‘पारस्परिक शुल्क’ (Reciprocal Tariffs) को 50% से घटाकर 18% कर दिया गया है. यह अन्य एशियाई देशों की तुलना में थोड़ा कम है.
  • भारत का कदम: इसके बदले में भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों के लिए टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को शून्य (Zero) करने की प्रतिबद्धता जताई है.

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By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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