Personal Loan : आमतौर पर लोग पर्सनल लोन तब लेते हैं जब कोई मेडिकल इमरजेंसी आ जाए या क्रेडिट कार्ड का भारी बिल चुकाना हो. लेकिन क्या आप जानते हैं कि चतुर निवेशक पर्सनल लोन का इस्तेमाल अपनी ‘नेट वर्थ’ और ‘इनकम’ बढ़ाने के लिए करते हैं?
पर्सनल लोन लेना बुरा नहीं है, बशर्ते आप उस पैसे को ऐसी जगह लगाएं जहां से रिटर्न लोन के ब्याज से ज्यादा मिले . आइए जानते हैं कैसे.
घर का हुलिया बदलें, किराया बढ़ाएं
अगर आप पर्सनल लोन लेकर घर में एक नया कमरा बनवाते हैं, किचन को आधुनिक बनाते हैं या सोलर पैनल लगवाते हैं, तो यह खर्च नहीं निवेश है.
- फायदा: अच्छी फिटिंग्स और इंटीरियर वाले घर का किराया ज्यादा मिलता है. साथ ही, सोलर पैनल लगवाने से बिजली का बिल भी कम हो जाता है, जिससे आपकी हर महीने की बचत बढ़ती है.
नई स्किल्स सीखें, सैलरी बढ़ाएं
आज के दौर में जो ‘अपडेट’ है, वही ‘इन डिमांड’ है. अगर आप डेटा एनालिटिक्स, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) या डिजिटल मार्केटिंग जैसे कोई प्रोफेशनल कोर्स करना चाहते हैं, तो पर्सनल लोन लेना समझदारी है.
- फायदा: नई स्किल आपकी CV को मजबूत करती है, जिससे आपको मौजूदा कंपनी में प्रमोशन या नई जगह बड़ी सैलरी वाली जॉब मिलने की संभावना बढ़ जाती है.
छोटे बिजनेस की शुरुआत
अगर आपके पास कोई शानदार बिजनेस आइडिया है जैसे बेकरी, ऑनलाइन स्टोर या फ्रीलांसिंग तो पर्सनल लोन आपकी ‘सीड कैपिटल’ (शुरुआती पूंजी) बन सकता है.
- फायदा: फाइनेंशियल प्लानर मानती हैं कि शुरुआती दौर में कर्मचारियों की सैलरी या दुकान का किराया निकालने के लिए पर्सनल लोन एक क्विक फंड की तरह काम करता है.
निवेश को टूटने से बचाएं
अक्सर किसी इमरजेंसी में लोग अपने पुराने म्यूचुअल फंड या FD तोड़ देते हैं, जिससे उन्हें पेनाल्टी भरनी पड़ती है और भविष्य का लक्ष्य अधूरा रह जाता है.
- एक्सपर्ट टिप: जानकारों का कहना है कि लॉन्ग टर्म निवेश को छेड़ने के बजाय शॉर्ट टर्म के लिए पर्सनल लोन लेना बेहतर है. इससे आपकी कंपाउंडिंग (ब्याज पर ब्याज) का फायदा जारी रहता है.
फ्रीलांसरों के लिए ‘प्रोफेशनल सेटअप’
अगर आप फोटोग्राफर, कंटेंट क्रिएटर या डिजाइनर हैं, तो एक हाई-एंड लैपटॉप या अच्छा कैमरा आपकी काम की क्वालिटी और स्पीड दोनों बढ़ा सकता है.
- फायदा: बेहतर उपकरणों की मदद से आप बड़े क्लाइंट्स पकड़ सकते हैं और अपनी कमाई को दोगुना कर सकते हैं।
लोन लेने से पहले ये बात गांठ बांध लें
फाइनेंस एक्सपर्ट शरद कोहली के अनुसार, पर्सनल लोन लेते समय ‘लिमिट’ का ध्यान रखना सबसे जरूरी है.
- 30-40% का नियम: आपकी कुल EMI आपकी ‘टेक होम’ सैलरी के 30% से 40% से ज्यादा नहीं होनी चाहिए.
- बैकअप प्लान: लोन लेने से पहले सोचें कि अगर 1-2 महीने जॉब न रही, तो क्या आप EMI भर पाएंगे? आपके पास कम से कम 3-6 महीने के खर्च जितना ‘इमरजेंसी फंड’ होना ही चाहिए.
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