Excise Duty exemption on Ethanol: भारत सरकार ने इथेनॉल (ethanol) ब्लेंडेड पेट्रोल को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने अब 22% से 30% तक इथेनॉल मिले पेट्रोल पर ‘एक्साइज ड्यूटी’ (excise duty) पूरी तरह खत्म कर दी है. इसमें E22, E25, E27 और E30 जैसे पेट्रोल वेरिएंट शामिल हैं. हाल ही में भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने भी इन उच्च इथेनॉल मिश्रणों के लिए नए क्वालिटी स्टैंडर्ड्स (IS 19850:2026) जारी किए हैं, जो 15 मई 2026 से लागू हो चुके हैं.
इथेनॉल के इस्तेमाल का क्या फायदा है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 87% तक कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, इथेनॉल एक ‘ग्रीन फ्यूल’ है जो प्रदूषण कम करता है और देश का पैसा विदेश जाने से बचाता है. इसका सबसे बड़ा फायदा हमारे किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलता है, क्योंकि इथेनॉल का उत्पादन भारत में ही होता है. अब तक सरकार का लक्ष्य E20 (20% इथेनॉल) तक पहुंचना था, जिसे समय से पहले ही हासिल कर लिया गया है. अब सरकार E30 तक के अगले पड़ाव की तैयारी कर रही है.
क्या गाड़ियों पर कोई असर पड़ेगा?
इथेनॉल को लेकर अक्सर लोग माइलेज और इंजन की परफॉर्मेंस को लेकर सवाल उठाते हैं. हालांकि, सरकार और ऑटोमोबाइल संस्थाओं ने स्पष्ट किया है कि यह सुरक्षित है. हालांकि, E20 या उससे अधिक मिश्रण वाली गाड़ियों के लिए ‘फ्लेक्स-फ्यूल’ (flex-fuel) इंजन का होना बेहतर होता है. सरकार ने हाल ही में E85 फ्यूल भी लॉन्च किया है, जो खास तौर पर फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों के लिए है और यह सामान्य पेट्रोल के मुकाबले करीब 20 रुपये सस्ता भी मिल रहा है.
क्या यह बदलाव आम आदमी के लिए है?
फिलहाल यह कदम सरकार की लंबी अवधि की रणनीति का हिस्सा है. जैसे-जैसे इथेनॉल का उत्पादन बढ़ेगा और तकनीक सस्ती होगी, आम जनता को फ्यूल के ज्यादा ऑप्शन मिलेंगे. सरकार का लक्ष्य इंपोर्ट पर निर्भरता खत्म करना और पर्यावरण को बचाना है. यह टैक्स छूट इस दिशा में उठाया गया पहला बड़ा आर्थिक कदम है, जो भविष्य में फ्यूल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मददगार साबित हो सकता है.
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