Gold Capital of India: भारत में सोना सिर्फ एक कीमती धातु नहीं है, बल्कि यह समृद्धि, परंपरा और सुरक्षा का प्रतीक है. शादियों से लेकर पारिवारिक विरासतों तक, हमारी संस्कृति में सोने का स्थान सबसे ऊपर है. लेकिन अगर देश में कोई एक ऐसा शहर है जो पूरी तरह सोने के रंग में रंगा है, तो वह है केरल का त्रिशूर (Thrissur). त्रिशूर को “भारत की गोल्ड कैपिटल” यानी सोने की राजधानी कहा जाता है. यह खिताब के पीछे बड़ी वजह यहां का विशाल ज्वेलरी कारोबार और सोने से जुड़ी मजबूत परंपरा है. देशभर के कई बड़े ज्वेलरी ब्रांड्स की जड़ें इसी शहर से जुड़ी हैं.
इसे ‘गोल्ड कैपिटल’ क्यों कहते हैं?
त्रिशूर में सोने का मजबूत इकोसिस्टम है. यह शहर भारत के संगठित सोना निर्माण और रिटेल व्यापार का एक बड़ा हिस्सा संभालता है. यहां सैकड़ों छोटे-बड़े ज्वेलरी वर्क्सशॉप और शानदार शोरूम हैं. भारत के कई नामी ज्वेलरी ब्रांड्स की शुरुआत इसी शहर से हुई थी. कल्याण ज्वेलर्स, जोयालुक्कास और भीमा ज्वेलर्स जैसे दिग्गज नामों की जड़ें त्रिशूर से ही जुड़ी हैं. दशकों से यहां सुनारों, डिजाइनरों, थोक विक्रेताओं और खुदरा व्यापारियों की एक ऐसी कड़ी तैयार हुई है जिसने इसे देश के आभूषण व्यापार का दिल बना दिया है.
केरल की शादियों से क्या है कनेक्शन?
केरल की संस्कृति में सोने का बहुत बड़ा सामाजिक महत्व है, खास तौर पर यहां की शादियों में. शादियों के मौके पर दुल्हन भारी और पारंपरिक सोने के गहनों से सजी नजर आती हैं. यहां के परिवार सोने को केवल एक सुंदर आभूषण नहीं, बल्कि भविष्य के लिए एक सुरक्षित इनवेस्टमेंट भी मानते हैं. ग्राहकों की इसी भारी मांग ने त्रिशूर को सोने के व्यापार का केंद्र बना दिया. यहां के कुशल कारीगरों और भरोसेमंद जौहरियों ने अपनी शुद्धता और बेहतरीन नक्काशी के दम पर देश-विदेश के ग्राहकों का भरोसा जीता है.
यह शहर अर्थव्यवस्था को कैसे चलाता है?
त्रिशूर का आभूषण उद्योग केवल खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य इंजन है. इस इंडस्ट्री से हजारों लोगों को आभूषण डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल, लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट (निर्यात) के क्षेत्र में रोजगार मिला हुआ है. कभी त्रिशूर के स्थानीय बाजारों से छोटे पारिवारिक व्यवसाय के रूप में शुरू हुए ब्रांड्स आज वैश्विक पहचान बना चुके हैं. इन कंपनियों के शोरूम अब मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों), यूरोप और उत्तरी अमेरिका तक फैले हैं.
त्योहारों में कैसे दिखता है इसका वैभव?
सोने के इस कारोबार की चमक यहां के सांस्कृतिक आयोजनों में भी साफ दिखाई देती है. त्रिशूर अपने ‘त्रिशूर पूरम’ उत्सव के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, जो केरल के सबसे भव्य त्योहारों में से एक है. इस उत्सव के दौरान सजे हुए हाथी, मंदिरों के पारंपरिक आभूषण और सोने की कलाकृतियों का शानदार प्रदर्शन शहर के वैभव और कलात्मकता को दुनिया के सामने पेश करता है.
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