Fact Check: 500 रुपये के इस नोट को बताया जा रहा नकली, जानें क्या है सच

PIB Fact Check 500 रुपये के खास तरह के नोट को लेकर जो दावा किया जा रहा है, उस पर पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने काम किया और पाया की दावा पूरी तरह से फर्जी है. पीआईबी ने फर्जी मैसेज को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर किया.

आरबीआई की ओर से 2000 रुपये के नोट को वापस लेने की घोषणा के बाद रोजाना 500 रुपये के नोट को लेकर भी कई खबरें चल रही हैं. सोशल मीडिया में इस समय एक मैसेज शेयर किया जा रहा है, जिसमें 500 के एक खास नोट को नकली बताया जा रहा है और उसे लोगों से नहीं लेने की अपील की जा रही है.

मैसेज में क्या किया जा रहा दावा ?

500 रुपये के नोट को लेकर एक दावा किया जा रहा है, जिसमें बोला जा रहा है कि 500 का वह नोट नहीं लेना चाहिए जिसमें हरी पट्टी आरबीआई गवर्नर के सिग्नेचर के पास न होकर गांधीजी की तस्वीर के पास होती है. दावा किया जा रहा है कि ऐसे 500 रुपये के नोट नकली हैं. मैसेज में यह भी सलाह दी जा रही है कि वैसे 500 रुपये के नोट को ही लेना चाहिए, जिसमें हरी पट्टी आरबीआई गर्वनर के सिग्नेचर के पास है.

क्या है दावे की सच्चाई

500 रुपये के खास तरह के नोट को लेकर जो दावा किया जा रहा है, उस पर पीआईबी की फैक्ट चेक टीम ने काम किया और पाया की दावा पूरी तरह से फर्जी है. पीआईबी ने फर्जी मैसेज को अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल से शेयर किया और सच से पर्दा उठाया. पीआईबी ने बताया, 500 रुपये को लेकर जो दावा किया जा रहा है वह पूरी तरह से फर्जी है. आरबीआई के अनुसार दोनों ही तरह के नोट मान्य होते हैं.

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लेखक के बारे में

By Arbindkumar mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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