बिजनेस में नहीं आएगी कैश की कमी, सरकार लाई ECLGS 5.0 की स्कीम

ECLGS 5.0 Scheme: पश्चिम एशिया संकट के बीच मोदी सरकार ने ECLGS 5.0 को दी मंजूरी. MSMEs और एयरलाइंस को मिलेगा 2.55 लाख करोड़ रुपये का बिना गारंटी वाला लोन. जानिए किसे होगा फायदा.

ECLGS 5.0 Scheme: पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारतीय व्यापार पर भी दिखने लगा है. कारोबारियों को नकदी की किल्लत से बचाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने मंगलवार को ‘इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम’ (ECLGS 5.0) को मंजूरी दे दी है. इस योजना के जरिए सरकार बाजार में 2,55,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त लोन पहुंचाने का लक्ष्य रख रही है. 

किसे और कितना मिलेगा फायदा?

इस योजना का मुख्य उद्देश्य MSMEs (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम) और एयरलाइन सेक्टर को सहारा देना है. सरकारी घोषणा के अनुसार, MSMEs और अन्य व्यवसायों को उनकी चौथी तिमाही (FY26) के दौरान इस्तेमाल की गई वर्किंग कैपिटल का 20% तक अतिरिक्त लोन मिल सकेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 100 करोड़ रुपये तय की गई है. वहीं, संकट से जूझ रही एयरलाइंस के लिए यह मदद 100% तक हो सकती है, जिसकी सीमा प्रति उधारकर्ता 1,500 करोड़ रुपये है. कुल बजट में से 5,000 करोड़ रुपये विशेष रूप से एयरलाइन सेक्टर के लिए रखे गए हैं. 

गारंटी और फीस का क्या नियम है?

सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस लोन के लिए कारोबारियों को कोई अतिरिक्त गारंटी देने की जरूरत नहीं होगी. ‘नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड’ (NCGTC) MSMEs के लिए 100% और अन्य बड़े बिजनेस व एयरलाइंस के लिए 90% लोन की गारंटी खुद लेगी. साथ ही, गारंटी फीस को भी शून्य (Nil) रखा गया है, ताकि छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ न बढ़े. यह सुविधा उन सभी के लिए उपलब्ध है जिनके खाते 31 मार्च 2026 तक स्टैंडर्ड (यानी कोई डिफॉल्ट नहीं) थे. 

पैसे चुकाने के लिए कितना समय मिलेगा?

सरकार ने कर्ज चुकाने की शर्तों को काफी लचीला बनाया है. MSMEs और अन्य बिजनेस के लिए लोन की अवधि 5 साल तय की गई है, जिसमें पहले 1 साल तक मूलधन (Principal) चुकाने से छूट यानी ‘मोराटोरियम’ मिलेगा. एयरलाइन सेक्टर के लिए स्थिति अधिक गंभीर देखते हुए उन्हें 7 साल का समय दिया गया है, जिसमें 2 साल का मोराटोरियम शामिल है. यह स्कीम 31 मार्च 2027 तक मंजूर होने वाले सभी लोन पर लागू होगी. 

सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?

कैबिनेट का मानना है कि पश्चिम एशिया के संघर्ष की वजह से सप्लाई चेन और नकदी के प्रवाह में जो रुकावटें आई हैं, यह योजना उन्हें दूर करेगी. इस कदम से न केवल व्यापार चलता रहेगा, बल्कि नौकरियों पर आने वाला खतरा भी कम होगा. सीधा सा मकसद यह है कि घरेलू उत्पादन न रुके और बाजार में लिक्विडिटी यानी कैश की कमी की वजह से कोई बिजनेस बंद न हो. 

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लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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