Delhi Market Crisis: मिडिल ईस्ट में छिड़े युद्ध के बाद दिल्ली की अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं. राजधानी के प्रमुख बाजारों में ड्राई फ्रूट्स और जरूरी दवाओं के कच्चे माल की कीमतों में 20 से 50 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जानकारों का मानना है कि अगर यह तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो दिल्ली का करीब 5000 करोड़ रुपये का कारोबार पूरी तरह ठप हो सकता है.
खारी बावली में सप्लाई ठप खजूर और बादाम की किल्लत
एशिया की सबसे बड़ी ड्राई फ्रूट मंडी खारी बावली में सन्नाटा पसरा है. आयात (Import) बाधित होने से बादाम, अंजीर, चिलगोजा और पिस्ता के दाम आसमान छू रहे हैं. व्यापारियों के मुताबिक, दुबई से होने वाला ट्रांजिट रूट प्रभावित होने के कारण स्टॉक खत्म हो रहा है. विशेष रूप से आगामी त्योहारों के कारण खजूर की मांग ज्यादा है, लेकिन आपूर्ति (Supply) शून्य के बराबर है.
फार्मा सेक्टर पर दोहरी मार
इस अंतरराष्ट्रीय विवाद की सबसे ज्यादा मार सेहत पर पड़ रही है. दवा बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल (Chemicals) की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है. पैरासिटामोल की लागत में करीब 47% का इजाफा हुआ है. एंटीबायोटिक दवाओं जैसे एमोक्सिसिलिन और सिप्रोफ्लॉक्सासिन के दाम भी बढ़ गए हैं, जिससे आने वाले दिनों में आम दवाइयां महंगी होना तय है.
स्ट्रीट फूड और छोटे व्यापारियों पर अस्तित्व का खतरा
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के अनुसार, कच्चे माल की महंगाई की वजह से दिल्ली के 50 हजार स्ट्रीट फूड वेंडर्स का धंधा चौपट होने की कगार पर है. आशंका जताई जा रही है कि इनमें से 30 फीसदी रेहड़ी-पटरी वाले अपना काम बंद कर सकते हैं. इसके अलावा प्लास्टिक, एल्युमिनियम और केमिकल इंडस्ट्री पर भी सप्लाई चेन टूटने का बुरा असर पड़ा है.
