Donkey Milk Paneer Rate: गधी के दूध से बना पनीर, लेकिन कीमत सुनते ही गला सूख जाएगा

Donkey Milk Paneer Rate: गधी का दूध यानी डंकी मिल्क. ये दुनियाभर में ‘liquid gold’ यानी तरल सोना के नाम से जाना जाता है. वजह? इसमें पाई जाती हैं जबरदस्त पोषक तत्व. वैज्ञानिक कहते हैं कि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड, और सबसे खास, लाइसोज़ाइम नाम का एंजाइम होता है

Donkey Milk Paneer Rate: अब तक आपने गाय-भैंस के दूध से बने पनीर के बारे में सुना होगा, खाया भी होगा. बाजार में 300 से 400 रुपये किलो बिकने वाला ये पनीर आम आदमी के थाली में अक्सर रहता है. लेकिन अब ज़रा दिल थाम के बैठिए, क्योंकि आज हम जिस पनीर की बात कर रहे हैं, उसकी कीमत सुनकर आपके होश उड़ सकते हैं. ये पनीर बनता है गधी के दूध से और इसकी कीमत है लगभग एक लाख रुपये किलो. हां, सही पढ़ा आपने. एक लाख.

अब सवाल उठता है कि आखिर इसमें ऐसा क्या है? क्यों कोई एक किलो पनीर के लिए इतना पैसा खर्च करेगा? तो चलिए, थोड़ा गहराई में चलते हैं.

क्या खास है गधी के दूध में?

गधी का दूध यानी डंकी मिल्क. ये दुनियाभर में ‘liquid gold’ यानी तरल सोना के नाम से जाना जाता है. वजह? इसमें पाई जाती हैं जबरदस्त पोषक तत्व. वैज्ञानिक कहते हैं कि इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, ओमेगा-3 फैटी एसिड, और सबसे खास, लाइसोज़ाइम नाम का एंजाइम होता है जो शरीर की इम्युनिटी को बूस्ट करता है.

इतना ही नहीं, कहा जाता है कि गधी के दूध में एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-वायरल गुण होते हैं. यानी बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है. रोम की रानी क्लियोपैट्रा भी इसी दूध से नहाया करती थीं. स्किन ग्लो के लिए.

गधी का दूध, लेकिन इतना महंगा क्यों?

गधी एक दिन में महज़ 200 से 300 मिलीलीटर दूध देती है. यानी एक किलो दूध इकट्ठा करने के लिए कई गधियों की जरूरत पड़ती है और यहीं से बढ़ती है इसकी कीमत. इसे पनीर में बदलना कोई आसान काम नहीं. दूध कम, प्रोसेसिंग खर्चा ज्यादा. इसीलिए जब पनीर बनता है, तो वो सोने के भाव बिकता है.

कहां बन रहा है ये पनीर?

भारत में अब कुछ स्टार्टअप्स गधी के दूध पर काम कर रहे हैं. गुजरात और तमिलनाडु जैसे राज्यों में इसकी फार्मिंग हो रही है. एक स्टार्टअप ने तो गधी के दूध से चॉकलेट और साबुन तक बना दिए हैं. अब उसी लिस्ट में जुड़ा है – पनीर.

हेल्थ है तो वेल्थ है

अब बात आती है कि क्या लोग इतना महंगा पनीर खरीद रहे हैं? तो जवाब है – हां. विदेशी मार्केट में इसकी अच्छी-खासी डिमांड है. हेल्थ कॉन्शस लोग, खासतौर पर यूरोप में, इसे हाथोंहाथ ले रहे हैं. मतलब सीधी सी बात – अगर हेल्थ पे ध्यान देना है और पॉकेट भारी है, तो गधी का पनीर भी ऑप्शन है. वरना 350 रुपये वाला गाय का पनीर तो है ही. स्वाद भी, भुजिया भी.

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By Abhishek pandey

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अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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