कच्चे तेल की कीमतों में गुरुवार को गिरावट देखने को मिली. बाजार में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के जरिए तेल सप्लाई सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है, वहीं रूस-यूक्रेन संघर्ष से रूसी ऊर्जा सप्लाई पर नए खतरे ने चिंता भी बढ़ाई है. इस खींचतान के बीच वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 82 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता रहा और इस हफ्ते अब तक करीब 6% गिर चुका है. वहीं ब्रेंट क्रूड भी 88 डॉलर प्रति बैरल से नीचे रहा.
तेल के दाम क्यों गिरे?
तेल बाजार में गुरुवार को काफी उतार-चढ़ाव रहा. रूस-यूक्रेन तनाव बढ़ने की खबरों के बाद शुरुआत में कच्चे तेल के दाम ऊपर गए, लेकिन बाद में ईरान और ओमान के बीच हॉर्मुज से आवाजाही को लेकर प्रगति की खबर ने तेजी को पलट दिया. इससे बाजार में उम्मीद बनी कि दुनिया के इस अहम तेल शिपिंग रूट से सप्लाई धीरे-धीरे बेहतर हो सकती है. अगर ऐसा होता है तो वैश्विक बाजार में मिडिल ईस्ट से ज्यादा तेल पहुंचने की संभावना बढ़ेगी.
हॉर्मुज को लेकर क्या नया अपडेट है?
ईरान की सेना ने बताया है कि उसने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ओमान के साथ राजस्व साझा करने का समझौता किया है. हालांकि, ईरान ने यह साफ किया है कि इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि जलमार्ग तुरंत पूरी तरह खुल जाएगा. फिर भी इस घटनाक्रम से बाजार में यह उम्मीद मजबूत हुई है कि हॉर्मुज के रास्ते ऊर्जा की आवाजाही में सुधार हो सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा है कि मंगलवार को हॉर्मुज से 10 मिलियन बैरल तेल बाहर गया, जिससे सप्लाई बढ़ने की उम्मीद को बल मिला.
ये भी पढ़ें: ईरान-ओमान की बातचीत से तेल की कीमतों में गिरावट, ब्रेंट 87 डॉलर से नीचे
रूस-यूक्रेन युद्ध से बढ़ी दूसरी चिंता
जहां मिडिल ईस्ट से सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है, वहीं रूस-यूक्रेन संघर्ष ने तेल बाजार के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है. यूक्रेन के रूसी रिफाइनरियों और बंदरगाहों पर हमलों से ईंधन उत्पादन प्रभावित हो रहा है. इससे रूस के लिए कच्चे तेल को निर्यात की ओर मोड़ना भी मुश्किल हो सकता है. यानी एक तरफ हॉर्मुज से सप्लाई सुधरने की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ रूसी सप्लाई में रुकावट का खतरा बना हुआ है.
साउदी अरेबिया क्या कर रहा है?
सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि साउदी अरेबिया पर्शियन गल्फ के भीतर से तेल लोडिंग बढ़ा सकता है. यमन के हूथी मिलिटेंट्स की रेड सी से गुजरने वाले जहाजों को लेकर धमकियों के बीच दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा तेल निर्यातक अपने निर्यात मार्गों में बदलाव कर रहा है. हालांकि इस सप्ताह कीमतों में करीब 6% की गिरावट आई है, लेकिन साल की शुरुआत के मुकाबले कच्चा तेल अभी भी 40% से ज्यादा महंगा है. इसकी बड़ी वजह पर्शियन गल्फ में छह महीने से जारी संघर्ष के कारण पैदा हुई सप्लाई बाधाएं हैं.
ये भी पढ़ें: LPG e-KYC की बढ़ी डेडलाइन, 31 अगस्त तक Aadhaar वेरिफिकेशन का मौका
