कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेजी देखने को मिल रही है. शुक्रवार को Brent क्रूड 93 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया और इस हफ्ते इसमें 5% से ज्यादा की बढ़त की उम्मीद है. वहीं, वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI अक्टूबर डिलीवरी करीब 86 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहा. यह लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त की ओर है.
तेल की कीमतों में यह तेजी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका ईरान पर दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है. इससे पहले से दबाव झेल रहे ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई को लेकर चिंता और बढ़ गई है.
अमेरिका ईरान पर क्या करने वाला है?
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि नए कदमों की जानकारी सोमवार को दी जाएगी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कार्रवाई को ‘इकोनॉमिक D-Day’ बताया है. नए कदम ईरान को निशाना बना सकते हैं. साथ ही, उन देशों पर भी असर पड़ सकता है जो ईरान के साथ कारोबार जारी रखते हैं. इसमें चीन भी शामिल हो सकता है. इस पूरे घटनाक्रम का असर कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ने की आशंका है. अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण इस साल तेल की कीमत पहले ही 50% से ज्यादा चढ़ चुकी है.
ईरान से तेल सप्लाई पर कितना असर?
ईरानी तेल की सप्लाई पर अमेरिकी दबाव पहले ही बढ़ चुका है. अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर नेवल ब्लॉकेड बनाए रखा है. ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासेर हेम्मती ने इस हफ्ते कहा कि देश से तेल का फ्लो ‘लगभग रुक गया है’. अगर यह स्थिति आगे भी बनी रहती है, तो ग्लोबल मार्केट में सप्लाई का दबाव और बढ़ सकता है. अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, अमेरिका जलमार्ग को कंट्रोल करता है और जहाज दक्षिणी लेन से बाहर निकल सकते हैं.
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चीन की चिंता क्यों बढ़ सकती है?
चीन ईरानी कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार है. बीजिंग ने अमेरिका के इस तरीके का विरोध किया है. चीन का कहना है कि प्रतिबंध और आर्थिक दबाव से विवाद का हल नहीं निकलेगा और बातचीत के जरिए समाधान होना चाहिए. हालांकि, बेसेंट ने चीन से अमेरिका के साथ सहयोग करने को कहा है. उनका कहना है कि चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से पूरा करता है.
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