नौकरी बदलने के बाद छूट गया HRA क्लेम? ITR फाइल करते समय ऐसे बचाएं टैक्स

HRA : क्या आप पिछले साल नौकरी बदलते समय कंपनी को रेंट रसीद देना भूल गए? चिंता न करें, आप ITR फाइल करते समय भी HRA छूट का दावा कर सकते हैं. जानिए अलग-अलग सैलरी पर HRA कैलकुलेट करने का सही तरीका.

HRA: करियर में ग्रोथ के लिए नौकरी बदलना अच्छी बात है, लेकिन भागदौड़ में हम अक्सर अपने निवेश और खर्चों के दस्तावेज (Documents) जमा करना भूल जाते हैं. सबसे ज्यादा नुकसान होता है ‘मकान किराया भत्ते’ यानी HRA पर मिलने वाली टैक्स छूट का. अगर आपने एक साल में तीन नौकरियां बदलीं और तीनों जगह बेसिक सैलरी अलग-अलग थी, तो HRA कैलकुलेट करना थोड़ा पेचीदा हो सकता है. लेकिन अच्छी खबर यह है कि आप पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) चुनकर अब भी टैक्स बचा सकते हैं.

एम्प्लॉयर को रसीद नहीं दी, तो क्या अब क्लेम मिलेगा?

हां, बिल्कुल! अगर आप किराए के घर में रह रहे थे और आपको सैलरी में HRA मिला है, तो आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय सीधे छूट मांग सकते हैं. इसके लिए आपको कंपनी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. बस ध्यान रहे कि यह सुविधा केवल पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) में ही उपलब्ध है.

महीने-दर-महीने (Month-by-Month) गणना है जरूरी

चूंकि आपने साल में तीन नौकरियां बदलीं और हर बार आपकी बेसिक सैलरी और HRA की रकम अलग थी, इसलिए आपको पूरे साल का एकमुश्त हिसाब लगाने के बजाय हर महीने की गणना अलग-अलग करनी होगी.

  • जॉब 1: उस अवधि की बेसिक सैलरी और वहां से मिला HRA देखें.
  • जॉब 2 और 3: इसी तरह बाकी नौकरियों के लिए भी अलग-अलग गणना करें.
  • इन सभी को जोड़कर जो कुल राशि आएगी, उसे आप अपनी ‘टैक्स फ्री’ इनकम के रूप में दिखा सकते हैं.

HRA छूट के लिए 3 शर्तें

इनकम टैक्स विभाग के अनुसार, इन तीन में से जो भी राशि सबसे कम होगी, वही टैक्स फ्री होगी.

आपको कंपनी से मिला कुल HRA.

मेट्रो शहर में रहने पर बेसिक सैलरी का 50% (नॉन-मेट्रो में 40%).
सालाना चुकाया गया किराया – बेसिक सैलरी का 10%.

इनकम टैक्स नोटिस से कैसे बचें?

जब आप ITR में HRA क्लेम करेंगे, तो आपकी कुल ‘टैक्सेबल सैलरी’ आपकी कंपनियों द्वारा दी गई जानकारी (Form 16) से कम होगी. ऐसे में इनकम टैक्स विभाग आपको नोटिस भेजकर स्पष्टीकरण मांग सकता है.

बचने के लिए क्या करें?

  • रेंट रसीदें संभाल कर रखें: भले ही कंपनी को न दी हों, लेकिन असेसिंग ऑफिसर कभी भी मांग सकता है.
  • रेंट एग्रीमेंट: आपके पास एक वैध रेंट एग्रीमेंट होना चाहिए.
  • बैंक ट्रांजेक्शन: कोशिश करें कि किराया बैंक के जरिए दिया हो, ताकि आपके पास पुख्ता सबूत रहे.
  • मकान मालिक का PAN: यदि सालाना किराया ₹1 लाख से ज्यादा है, तो मकान मालिक का पैन नंबर देना अनिवार्य है.

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लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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