8th Pay Commission: 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा तेज हो गई है, लेकिन इसके साथ कुछ ऐसे शब्द भी बार-बार सामने आ रहे हैं जिनका सीधा असर कर्मचारियों और पेंशनर्स की जेब पर पड़ता है. इनमें Dearness Allowance (DA), Dearness Relief (DR) और Fitment Factor सबसे अहम हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि ये तीनों चीजें क्या हैं और 8वें वेतन आयोग में इनकी भूमिका कितनी महत्वपूर्ण रहने वाली है.
DA और DR आखिर क्यों हैं इतने जरूरी?
महंगाई बढ़ने पर कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत देने के लिए सरकार Dearness Allowance (DA) और Dearness Relief (DR) देती है. DA कर्मचारियों की सैलरी में जुड़ता है, जबकि DR पेंशनर्स को मिलता है. दोनों की गणना बेसिक पे के प्रतिशत के रूप में की जाती है और साल में दो बार संशोधित किए जाते हैं. सरकार ने अप्रैल 2026 में DA और DR को 58% से बढ़ाकर 60% कर दिया था. यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2026 से लागू मानी गई है. बढ़ती महंगाई के बीच DA और DR कर्मचारियों और पेंशनर्स की आय को सहारा देने में अहम भूमिका निभाते हैं.
फिटमेंट फैक्टर क्या है और इसका असर कितना होता है?
वेतन आयोग में सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर को लेकर होती है. यही वह गुणांक है जिसके आधार पर मौजूदा बेसिक सैलरी को नई बेसिक सैलरी में बदला जाता है.
इसका सीधा फॉर्मूला है:
मौजूदा बेसिक वेतन × फिटमेंट फैक्टर = नया बेसिक वेतन
7वें वेतन आयोग में 2.57 के फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 7,000 रुपये से बढ़कर 18,000 रुपये हो गई थी.
3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू हुआ तो क्या बदलेगा?
8वें वेतन आयोग के लिए अभी फिटमेंट फैक्टर तय नहीं हुआ है. हालांकि कर्मचारी संगठनों ने 3.83 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है. अगर यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है तो कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है. Level-1 की न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है. वहीं Level-2, Level-3 और Level-4 के कर्मचारियों की बेसिक पे भी मौजूदा स्तर से काफी ऊपर जा सकती है. Level-10 के कर्मचारियों की बेसिक सैलरी 56,100 रुपये से बढ़कर 2.15 लाख रुपये से अधिक हो सकती है. सबसे ऊंचे Level-18 में यह आंकड़ा करीब 9.6 लाख रुपये तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.
8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट कब आएगी?
8वें वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025 को किया गया था. आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 18 महीने का समय मिला है. सुझाव और ज्ञापन भेजने की अंतिम तारीख 15 जून 2026 तय की गई है.
पिछले वेतन आयोगों के अनुभव को देखें तो सिफारिशें 2027 में सामने आ सकती हैं. हालांकि पूरी तरह लागू होने में 2029 या 2030 तक का समय भी लग सकता है. फिलहाल कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजरें फिटमेंट फैक्टर पर टिकी हैं, क्योंकि यही उनकी भविष्य की सैलरी और पेंशन में सबसे बड़ा बदलाव तय करेगा.
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