नयी दिल्ली : भारतीय तंबाकू संस्थान (टीआईआई) के मुताबिक, ऊंचा कराधान केवल सिगरेट तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि सभी प्रकार के तंबाकू उत्पादों को इसके दायरे में लाया जाना चाहिए जिससे तंबाकू उत्पादों को लेकर बढती समस्याओं से मुकाबला किया जा सके.
टीआईआई के निदेशक सैयद महमूद अहमद ने बताया, कर का दायरा बढाने से न केवल सरकार को भारी राजस्व संग्रह में मदद मिलेगी, बल्कि अवैध सिगरेट की वृद्धि पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी जोकि सरकार की तंबाकू नियंत्रण नीतियों के उद्देश्य के मुताबिक है. टीआईआई एक उद्योग निकाय है जो सिगरेट उद्योग का प्रतिनिधित्व करता है.
उन्होंने कहा, भारत में कुल तंबाकू खपत का केवल 12 प्रतिशत हिस्सा वैध सिगरेट हैं, जबकि बाकी 88 प्रतिशत अन्य तरह के तंबाकू उत्पाद हैं जो असंगठित क्षेत्र में तैयार किए जाते हैं.
