Viral Video: जोधपुर के रहने वाले पुनाराम की नई इलेक्ट्रिक कार का नागौर में 1700 रुपये का चालान काटा गया. इसमें सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि ₹1500 का जुर्माना सिर्फ इसलिए लगाया गया क्योंकि पुलिस के सिस्टम में गाड़ी का PUC सर्टिफिकेट “NIL” दिखा रहा था.
पूरा मामला: आखिर क्यों कटा चालान?
6 अप्रैल को जब अशोक पंवार (पुनाराम के भाई) कार लेकर नागौर के RTO रोड से गुजर रहे थे, तब पुलिस ने उन्हें रोका. मौके पर मौजूद ASI राजकुमार का कहना था कि ऑनलाइन चेकिंग मशीन में वाहन का प्रदूषण प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं दिख रहा है.
अशोक पंवार ने पुलिसकर्मी को समझाया कि यह एक इलेक्ट्रिक गाड़ी है, इसमें साइलेंसर ही नहीं होता, तो प्रदूषण प्रमाणपत्र की जरूरत कैसे हो सकती है? पुलिस ने दलील नहीं मानी और ₹1500 (PUC) + ₹200 (टिंटेड ग्लास/जाली) का कुल ₹1700 का चालान थमा दिया.
क्या कहते हैं नियम?
इस मामले ने नियमों और पुलिस की तकनीकी समझ पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के नियमों के अनुसार, बैटरी से चलने वाले वाहनों (EV) को PUC सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि वे शून्य उत्सर्जन (Zero Emission) वाहन हैं. हालांकि PUC वाला चालान गलत लग रहा है, लेकिन गाड़ी के शीशों पर काली फिल्म या किसी भी तरह की जाली लगाना नियमों के खिलाफ है. इसके लिए पुलिस चालान काट सकती है.
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोग राजस्थान पुलिस और परिवहन विभाग के सिस्टम का मजाक बना रहे हैं. यूजर्स का कहना है कि जब गाड़ी में इंजन ही नहीं है, तो पुलिस ‘NIL’ रिकॉर्ड के आधार पर चालान कैसे काट सकती है?
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