नयी दिल्ली : दूरसंचार क्षेत्र गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है. इस संकट के बीच वोडाफोन समूह के चेयरमैन जेरार्ड क्लिस्टरली और मुख्य कार्यकारी अधिकारी निक रीड ने सोमवार को दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश से मुलाकात की. इस बैठक में कंपनी ने स्पेक्ट्रम के भुगतान की वसूली दो साल के लिए टालने की मोहलत मांगी है.
सरकार कंपनियों को स्पेक्ट्रम का पैसा टुकड़ों में चुकाने की सहूलियत दे रखी है. वोडाफोन समूह के अधिकारियों ने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से भी मुलाकात की. दूरसंचार सचिव के साथ बैठक के बाद क्लिस्टरली ने कहा कि ब्रिटेन के दूरसंचार समूह की हमेशा से सरकार से अच्छी चर्चा होती है.
वोडाफोन का वोडाफोन-आइडिया के जरिये भारत में निवेश है. बाजार में इस तरह की अटकलों की क्षेत्र में दबाव के मद्देनजर कंपनी संभवत: भारत में अधिक समय तक निवेशक नहीं रहेगी. रीड ने कहा कि हम अपने कारोबार को वोडाफोन और आइडिया के साथ एकीकरण पर पूरा ध्यान लगा रहे हैं. उद्योग सूत्रों ने कहा कि इस बैठक में पूर्व की नीलामियों में खरीदे गये स्पेक्ट्रम के भुगतान पर दो साल की रोक के अलावा लंबे समय से चला आ रहा जीएसटी इनपुट कर क्रेडिट का मुद्दा भी उठा.
इससे पहले वोडाफोन आइडिया के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला ने भी सरकार को उद्योग के संकट की ओर इशारा करते हुए सांविधिक भुगतान को टालने का आग्रह किया था, क्योंकि यह क्षेत्र अपने कर्ज के भुगतान के लिए पर्याप्त नकदी नहीं जुटा पा रहा है. मुकेश अंबानी की अगुआई वाली रिलायंस जियो की ओर से मिल रही प्रतिस्पर्धा की जह से उद्योग का शुल्क घटा है. साथ ही, इससे उद्योग का मुनाफा कम हुआ और कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ा है.
