Nawada News : नवादा कार्यालय. संकट मोचन मंदिर जिले का शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जो इस पावन स्थल से अपरिचित हो. महाबली हनुमान का यह मंदिर पिछले कई दशकों से लाखों लोगों की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. जिले में कोई भी शुभ कार्य हो, नयी गाड़ी की खरीदारी हो या चुनाव का नामांकन, लोग सबसे पहले संकट मोचन के दरबार में ही मात्था टेक कर अपने काम की शुरुआत करते हैं. रामनवमी के पावन अवसर पर तो यहां श्रद्धालुओं का विशाल सैलाब उमड़ पड़ता है. इस ऐतिहासिक मंदिर में बजरंगबली की भव्य प्रतिमा करीब 42 साल पहले स्थापित की गयी थी.
खाई नुमा सुनसान जगह से भव्य मंदिर बनने की कहानी
जब यहां प्रतिमा स्थापित की गयी थी, तब यह पूरा इलाका बेहद सुनसान था. मुख्य सड़क से काफी नीचे एक खाई नुमा जगह पर प्रतिमा की स्थापना की गयी थी. काफी समय तक प्रभु की प्रतिमा खुले आसमान के नीचे ही विराजमान रही. इसके बाद धीरे-धीरे महाबली हनुमान के भक्तों का कारवां जुड़ता चला गया और आज यह नवादा शहर का सबसे भव्य और बड़ा धार्मिक स्थल बन गया है. वर्तमान में हर सप्ताह 10,000 से अधिक श्रद्धालु संकट मोचन मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
महंत और पुजारी की देखरेख में सजता है दरबार
वर्तमान में महंत नकुल दास उदासीन और पुजारी नारायण देव उदासीन की अगुवाई में हर दिन हजारों लोग यहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं. वैसे तो यहाँ हर रोज ही भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को यहां का नजारा देखते ही बनता है. इन दो विशेष दिनों में तकरीबन दो से ढाई हजार श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इसके साथ ही, दो माह पहले ही संकट मोचन मंदिर से सटा हुआ भव्य लक्ष्मी नारायण मंदिर भी बनकर तैयार हुआ है, जो भक्तों के आकर्षण का नया केंद्र है.
