रहीम दास बोले: अनुचित उचित रही लुध...

अनुचित उचित रही लुध, करहि बड़ेन के जोर ! ज्यों ससि के संयोग ते, पचवत आगि चकोर !! अर्थात महान् लोगों का सहयोग और समर्थन पाकर कभी-कभी छोटे लोग भी बड़े-बड़े काम कर जाते हैं. जैसे चंद्रमा के प्रेम में स्वंय को भूलकर चकोर अंगारे खाकर पचा लेता है.

अनुचित उचित रही लुध, करहि बड़ेन के जोर !

ज्यों ससि के संयोग ते, पचवत आगि चकोर !!

अर्थात

महान् लोगों का सहयोग और समर्थन पाकर कभी-कभी छोटे लोग भी बड़े-बड़े काम कर जाते हैं. जैसे चंद्रमा के प्रेम में स्वंय को भूलकर चकोर अंगारे खाकर पचा लेता है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >